केंचुए की आंतरिक संरचना
शरीर भित्ति (Body wall) - केंचुए में शरीर भित्ति चार स्तरों से बनी होती है। बाह्यतम अकोशिकीय क्यूटिकिल, एपीडर्मिस, पेशीय स्तर वर्तुल (circular) व अनुदैर्ध्य (longitudinal) तथा सबसे भीतरी स्तर सीलोमिक एपीडर्मिस्। एक कोशिका मोटे एपीडर्मिस स्तर में ग्रन्थि कोशिकाएँ भी पायी जाती हैं।
शरीर गुहा (Coelom) - सत्य देहगुहा अनुप्रस्थ पटों द्वारा अनेक खण्डों में विभाजित रहती है। पहले चार खण्डों तथा खण्ड 8 व 9 तथा 9 व 10 के बीच पटों (Septa) का अभाव होता है। 14वें खण्ड के बाद के पट छिद्रित होते हैं। सीलोम में देहगुहीय तरल भरा रहता है।
आहार नाल (Alimentary canal) - केंचुए में आहार नाल पहले से अन्तिम खण्ड के बीच फैली एक सीधी नली होती है। इसके अग्रस्थ सिरे पर स्थित मुख एक मुख गुहा (1-3 खण्ड) में खुलता है, जो पेशीय ग्रसनी में खुलती है। अगला भाग ईसोफेगस (5-7 खण्ड) है जो 8-9वें खण्ड में स्थित पेशीय गिजर्ड में खुलता है। गिजर्ड 9 से 14 खण्ड में फैले आमाशय से जुड़ा होता है जो अंत में 15वें खण्ड से अंतिम खण्ड तक फैली आँत में खुलता है। 26वें खण्ड से आँत से दो पतले शंकुनुमा आंत्रीय सीकी (intestinal caecae) निकलते हैं। आँत, अंतिम खण्ड में स्थित गुदा द्वारा शरीर से बाहर खुलती है। 26वें से 35वें खण्ड के बीच आँत में पाया जाने वाला पृष्ठीय भित्ति का आंतरिक मोड़ टिफ्लोसोल (typhlosole) आँत की विशेषता है।
परिसंचरण तंत्र (Circulatory system) - केंचुए में बन्द परिवहन तंत्र पाया जाता है जो रक्त वाहिकाओं, कोशिकाओं व हृदय से मिलकर बना होता है। चौथे, पाँचवें व छठे खण्ड में रक्त ग्रन्थियाँ पायी जाती हैं जिनमें रक्त का निर्माण होता है।
उत्सर्जी तंत्र (Excretory system) - उत्सर्जी तंत्र पटीय रूप से व्यवस्थित कुण्डलित संरचनाओं नेफ्रीडिया (nephridia) का बना होता है। यह तीन प्रकार के होते हैं - पटीय नेफ्रीडिया (septal nephridia) 15वें से अंतिम खण्ड तक पटों पर स्थित व आँत में खुलते हैं। देह भित्ति से जुड़े इन्टेगुमेंटरी नेफ्रीडिया (तीसरे खण्ड से अंतिम खण्ड तक)। यह शरीर सतह पर खुलते हैं। ग्रसनीय या फैरिन्जियल नेफ्रीडिया जो तीन जोड़ी गुच्छों एक रूप में चौथे, पाँचवें व छठे खण्ड में स्थित होते हैं।
तंत्रिका तंत्र (Nervous system) - यह एक जोड़ी सेरीब्रल गैंग्लिया, एक जोड़ी सब-फैरिन्जियल गैंग्लिया, उनको जोड़ने वाली पेरी-फैरिन्जियल कनेक्टिव तथा मध्य अधरीय नर्व कॉर्ड का बना होता है। इस नर्व कोर्ड पर प्रत्येक खण्ड में एक गैंग्लिया होता है।
जनन तंत्र (Reproductive system) - केंचुआ द्विलिंगी (hermaphrodite) जन्तु है, अर्थात वृषण व अण्डाशय एक ही जीव में उपस्थित होते हैं। 10वें व 11वें खण्ड में दो जोड़ी वृषण उपस्थित होते हैं। इनसे निकली शुक्रवाहिका 18वें खण्ड में प्रोस्टेट ग्रन्थि की नलिका से जुड़ जाती हैं। 17वें व 19वें खण्ड में एक-एक जोड़ा सहायक ग्रन्थि स्थित होती है। शुक्रवाहिका व प्रोस्टेट नलिका के जुड़ने से बनी साक्षी नलिका, 18वें खण्ड की अधरीय पार्श्व सतह पर एक जोड़ी नर जनन छिद्र के रूप में खुलती है।
छठवें से नवें खण्ड में से प्रत्येक में, एक-एक जोड़ी (अर्थात कुल चार जोड़ी) स्पर्मेथीकी (spermathecae) पाये जाते हैं।
केंचुए में के जोड़ी अण्डाशय 12वें व 13वें खण्ड के मध्य के पट से जुड़ा पाया जाता है। प्रत्येक अण्डाशय के नीचे स्थित ओवेरियन फनल पीछे-जुड़कर अण्डवाहिनी (oviduct) का निर्माण कर देती है। यह अण्डवाहिनी 14वें खण्ड में स्थित एक मात्र मध्य अधरीय मादा जनन छिद्र के रूप मे खुलती है।