प्रोटीन्स अमीनो अम्लों के रेखीय बहुलक हैं। प्रोटीन अणु में अमीनो अम्ल पेप्टाइड बंध द्वारा जुड़े होते हैं। कुल ज्ञात 20 प्रकार के अमीनो अम्ल विभिन्न अनुक्रमों में समायोजित होकर लाखों प्रकार की प्रोटीन बनाते हैं। प्रोटीन की संरचना को निम्न प्रकारों में बाँटा गया है -
(1) प्राथमिक संरचना (Primary Structure) - प्रोटीन या पॉलीपेप्टाइड में अमीनो अम्लों का अनुक्रम प्रोटीन की प्राथमिक संरचना बनाता है। प्राथमिक संरचना यद्यपि अत्यंत महत्वपूर्ण है किन्तु यह प्रोटीन को क्रियाशील नहीं बनातीं।
(2) द्वितीयक संरचना (Secondary Structure) - कार्यशील होने के लिए प्रोटीन को एक त्रिविमीय रूप अपनाना होता है। एक क्रियाशील प्रोटीन में एक या अधिक पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला होती है। इन श्रृंखलाओं में अमीनो अम्लों का क्रम यह निर्धारित करता है कि श्रृंखला कहाँ से मुड़ेगी या झुकेगी और कहाँ इसके विभिन्न खण्ड आपस में आकर्षित होंगे व उनमें हाइड्रोजन बंध बनेंगे।
विभिन्न भागों के बीच हाइड्रोजन बंध बनाकर प्रोटीन द्वितीयक संरचना प्राप्त करती है। जब श्रृंखला एक कुंडली की भाँति होती है तो `alpha`- हेलिक्स कहलाती है। जब दो या अधिक श्रृंखलाएँ अन्तर आण्विक हाइड्रोजन बन्धों से जुड़ी होती हैं तो प्लीटीड शीट (Pleated sheet) का निर्माण होता है (किरेटिन में `alpha`- हेलिक्स व सिल्फ में प्लीटीड शीट संरचना पायी जाती है)।
(3) तृतीयक संरचना (Tertiary Structure) - कुछ प्रोटीन जैसे एन्जाइम के अणुओं में और अधिक झुकावों, मोड़ों, कुण्डलन की आवश्यकता होती है ताकि क्रियाशीलता प्राप्त की जा सके इसे तृतीयक संरचना कहते हैं।
यह कुण्डलन व मोड़ इस प्रकार बनते हैं जिससे अध्रुवीय अमीनो अम्ल पार्श्व श्रृंखलाओं को छिपाया जा सके व ध्रुवीय पार्श्व श्रृंखलाओं को अनावृत किया जा सके। यह संरचना श्रृंखला में दूरस्थ स्थित अमीनो अम्लों को आस-पास ला देती है। इसी से एन्जाइम के सक्रिय स्थलों का निर्माण होता है। यह संरचना pH, तापमान व रसायनों की उपस्थिति से बदल सकती है।
(4) चतुर्थक संरचना (Quaternary Structure) - दो या अधिक पॉलीपेप्टाइड श्रृंखलएँ किसी अन्य समूह से जुड़कर चतुर्थक संरचना बनाते हैं। जैसे - हीमोग्लोबिन (प्रोटीन + हीम)।