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Class 11
BIOLOGY
वाटसन व क्रिक द्वारा प्रस्तावित DNA द्वि...

वाटसन व क्रिक द्वारा प्रस्तावित DNA द्विकुण्डली संरचना का संक्षिप्त परिचय दीजिए।

लिखित उत्तर

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(i) DNA अणु दो पॉलीन्यूक्लियोटाइड श्रृंखलाओं का बना होता है। इसमें आधार या रीढ़ फॉस्फेट शर्करा अणुओं का होता है जिसमें से क्षारक अन्दर की ओर निकले होते हैं।
(ii) दोनो श्रृंखलाएँ एक-दूसरे के प्रति समानान्तर होती हैं अर्थात एक श्रृंखला की ध्रुवता 5'-3' होती है तो दूसरे की 3'-5' होती है। सरल शब्दों में इनकी दिशा विपरीत होती है।
(iii) प्रत्येक श्रृंखला एक दक्षिणावर्ती कुण्डलित स्पाइरल बनाती है तथा दोनों श्रृंखलाएँ मिलकर द्विकुण्डली बना लेती हैं।
(iv) दोनो रज्जुकों के क्षारक आपस में हाइड्रोजन बन्ध द्वारा युग्मित हो क्षार युग्म बनाते हैं। एक रज्जुक का एडिनीन हमेशा दूसरे रज्जुक के थायमीन के साथ तथा थायमीन, एडिनीन के साथ युग्म बनाता है। एडिनीन व थायमीन के बीच दो हाइड्रोजन बन्ध होते हैं। इसी प्रकार साइटोसीन ग्वानीन के साथ युग्म बनाता है। इन दोनों के बीच तीन हाइड्रोजन बंध होते हैं। इसका तात्पर्य है क्षारक युग्म में हमेशा एक प्यूरीन व एक पिरीमिडीन होता है। इससे दोनों रज्जुकों के बीच समान दूरी बनी रहती है।
(v) DNA अणु के अक्ष पर दो निकटवर्ती क्षारक युग्मों के बीच की दूरी 0.34 नेनोमीटर होती है `(1nm=10^(-9)m)`।

(vi) द्विकुण्डली का एक मोड़ (turn) 3.4 नेनोमीटर का होता है। प्रत्येक घुमाव में लगभग 10 क्षारक पाये जाते हैं।
(vii) द्विकुण्डली में प्रत्येक रज्जुक दूसरे का पूरक होता है।
(viii) DNA द्विकुण्डली में क्षारक युग्म एक के ऊपर एक क्रम में व्यवस्थित होकर इसकी द्विकुण्डलित संरचना को स्थायित्व प्रदान करते हैं।
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