नाइट्रोजन चक्र को प्रकृति का पूर्ण जैव भू-रासायनिक चक्र कहा जाता है। वायमण्डल में लगभग 78% नाइट्रोजन होती है जो मुक्त नाइट्रोजन के रूप में पायी जाती है।
अतः हरे पौधों को उपलब्ध नहीं होती। यह प्रकृति में नाइट्रोजन का प्रमुख स्रोत (pool) है। यह नाइट्रोजन स्थिरीकरण द्वारा मृदा तक पहुँचती है। नाइट्रोजन स्थिरीकरण की तीन विधियाँ हैं
(i) जैविक नाइट्रोजन स्थिरीकरण-कुछ जीवधारी वायुमण्डल की मुक्त नाइट्रोजन को नाइट्रोजन के यौगिकों में बदल देते हैं---
सहजीवी जीवाणु-राइजोबियम। 'मुक्तजीवी जीवाणु-एजोटोबैक्टर, नील-हरित शैवाल।
(ii) वायुमण्डलीय नाइट्रोजन स्थिरीकरण-आकाशीय विद्युत् बादलों के गरजने के प्रभाव से वायुमण्डल की मुक्त `N_2` ऑक्सीजन व जल से संयोग कर `"HNO"_3`, व `"HNO"_2`, के रूप में मृदा तक पहुँच जाती है |
(iii) रासायनिक स्थिरीकरण-वायुमण्डल की नाइट्रोजन का प्रयोग फर्टिलाइजर उद्योगों में यूरिया बनाने हेतु किया जाता है।
इन तीन विधियों द्वारा वायुमण्डल की मुक्त नाइट्रोजन मृदा में पहुँच जाती है। मृदा में पहुँची नाइट्रोजन को हरे पौधों द्वारा नाइट्रेट, नाइट्राइट या अमोनियम आयन के रूप में अवशोषित कर लिया जाता है। पौधे इस अकार्बनिक नाइट्रोजन से प्रोटीन का निर्माण करते हैं। पौधों का भक्षण जन्तुओं द्वारा किया जाता है अत: नाइट्रोजन जन्तु शरीर में पहुँच. जाती हैं। पादपों व जन्तुओं की मृत्यु के बाद यह प्रोटीन मृदा में मिल जाती है।
अमोनीफिकेशन- इस प्रक्रिया में पादपों व जन्तुओं के मृत शरीर की प्रोटीन का विघटन सूक्ष्मजीवधारियों द्वारा किया जाता है जिसमें अमोनिया मुक्त होती है। प्रोटीन्स का सूक्ष्मजीवों द्वारा अमोनिया में विघटन ही अमोनीफिकेशन कहलाता है।
नाइट्रीफिकेशन-मृदा के कुछ जीवाणु इस मुक्त अमोनिया को पहले नाइट्राइट व फिर नाइट्रेट में ऑक्सीकृत कर देते हैं। अमोनिया का नाइट्राइट से होते हुए नाइट्रेट में बदलना नाइट्रीफिकेशन कहलाता है।
`2NH_3 + 3O_2 underset("नाइट्रोकोक्स")overset("नाइट्रोसोमोनास")(to)2NO_(2)^(-)+2H + 2H_(2)O+"ऊर्जा"`
`2NO_(2)^(-)+O_(2)overset("naitrobektar")(to)2NO_(3)^(-)+"ऊर्जा"`
इस प्रकार यह नाइट्रोजन पौधों द्वारा अवशोषण करने योग्य हो जाती है।
डीनाइट्रीफिकेशन-मृदा में उपस्थित नाइट्रेट्स का सूक्ष्मजीवों द्वारा मुक्त नाइट्रोजन में परिवर्तन डीनाइट्रीफिकेशन कहलाता है। इस प्रक्रिया से नाइट्रोजन पुनः प्रकृति के प्रमुख पूल वायुमण्डल' में पहुँच जाती है।
राइजोबियम के द्वारा वातावरणीय नाइट्रोजन के स्थिरीकरण के लिए क्या आवश्यकताएँ हैं? नाइट्रोजन स्थिरीकरण में इनका महत्व लिखिए। राइजोबियम जीवाणु मटर कुल के पौधों की जड़ों की मूल ग्रन्थिकाओं (root nodules) में पाए जाने वाले सहजीवी जीवाणु हैं। इन जीवाणुओं को वातावरणीय नाइट्रोजन के स्थिरीकरण हेतु निम्न आवश्यकताएँ होती हैं
(i) एन्जाइम नाइट्रोजिनेज जो एक Mo-Fe प्रोटीन है। वह वायुमण्डलीय नाइट्रोजन के अमोनिया में बदलाव को प्रेरित करता है।
(ii) अवायवीय परिस्थितियाँ (anaerobic conditions) क्योंकि एंजाइम नाइट्रोजिनेज ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में ही कार्य करता है।
यह कार्य गुलाबी रंग का वर्णक लेग हीमोग्लोबिन करता है। यह ऑक्सीजन को अवशोषित कर अवायवीय परिस्थिति उत्पन्न कर देता है।
अन्य आवश्यकताएँ हैं
(i) एक प्रबल अपचायक (reducing agent), जैसे—`N"ADPH"_2`, `"FMNH"_2`
(ii) ATP के रूप में ऊर्जा।
(iii) एंजाइम तंत्र।
इन आवश्यकताओं की पूर्ति होने पर ही नाइट्रोजन स्थिरीकरण सम्भव हो पाता है। बिना अपचायक के आवश्यक हाइड्रोजन उपलब्ध नहीं हो पाती जो नाइट्रोजन को अमोनिया में परिवर्तित करती है। ATP के रूप में ऊर्जा व विकर तंत्र की उपस्थिति का भी विशिष्ट महत्व है।
`N_(2)+8e^(-)+8H+"16ATP"to NH_3 + H_2 + "16ADP"+"16 Pi"`