(1) सिल्वर तथा गोल्ड के निष्कर्षण में - `Ag_(2)S` (सिल्वर ग्लांस) अयस्क सोडियम सायनाइड के साथ क्रिया कर सोडियम अर्जेंटोसायनाइड अंकुल यौगिक बनता है। (2) धातु शुद्धीकरण में - अविलेय पदार्थों के विलेय संकुल बनाये जाते हैं। जैसे - बॉक्साइट अयस्क NaOH से क्रिया कर विलेय संकुल सोडियम मेटाऐलुमिनेट बनाता है। `Al_(2)O_(3).2H_(2)O + 2NaOH rarr underset("(संकुल)")(2NaAlO_(2)) + 3H_(2)O` (3) फोटोग्राफी में - निगेटिव पर लगा हुआ अवियोजित AgBr, सोडियम थायोसल्फेट के विलयन में विलेय संकुल बनाकर घुल जाता है। `AgBr + 2Na_(2)S_(2)O_(3) rarr Na_(3)underset("(विलेय संकुल)")([Ag(S_(2)O_(3))_(2)]+ NaBr)` (4) विद्युत् लेपन में - प्रायः विद्युत् लेपन क्रिया में विद्युत् अपघट्य के रूप में विलेय संकुल यौगिक का विलयन प्रयुक्त किया जाता है। उदाहरण - सिल्वर के लेपन में `K[Ag(CN)_(2)]` संकुल का उपयोग किया जाता है। (5) जल की कठोरता के निर्धारण में - प्रायः कठोर जल में कैल्शियम तथा मैग्नीशियम के आयन होते हैं, ये आयन EDTA से संयोग कर स्थायी सनक बना लेता है, जिससे जल में से `Ca^(2+), Mg^(2+)` आयन दूर हो जाते हैं, जल मृदु हो जाता है।