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PHYSICS
प्राचीनकाल से ही लोगों में प्राकृतिक परि...

प्राचीनकाल से ही लोगों में प्राकृतिक परिघटनाओं जैसे रात दिन का होना, ऋतू में परिवर्तन होना , सूर्यग्रहण , चंद्रग्रहण आदि के कारणों को जानने की जिज्ञासा रही है । तारों, ग्रहों और उनकी गतियों का प्रेक्षण कर विभिन्न सिद्धांत प्रतिपादित किए गए हैं । आज से लगभग 2000 वर्ष पूर्व टॉलमी ने 'भूकेंद्रीय' मॉडल का प्रतिपादन किया था जिसके अनुसार सभी आकाशीय पिंड , तारे , सूर्य तथा ग्रह पृथ्वी की परिक्रमा करते हैं । 5वीं शताब्दी में भारतीय वैज्ञानिक आर्यभट्ट ने सूर्य केंद्रीय मॉडल का प्रतिपादन किया जिसके अनुसार सूर्य को सभी ग्रहों की गतियों का केंद्र माना गया है । एक हजार वर्ष बाद पोलैंड के निकोलस कोपरनिकस ( 1473 - 1543 ) ने भी सूर्य केंद्रीय सिद्धांत का प्रतिपादन किया, जिसके अनुसार स्थिर सूर्य के चारों ओर सभी ग्रह वृत्तीय कक्ष में परिक्रमा करते हैं । इटली के वैज्ञानिक गैलीलियो ( 1564 - 1642 ) ने इस सिद्धांत का समर्थन किया , किन्तु उन पर तात्कालीन आस्था के विरुद्ध होने के कारण शासन द्वारा मुक़दमा चलाया गया । उसी समय डेनमार्क ने वैज्ञानिक टायको ब्रेह ( 1546 - 1601 ) ने नंगी आँखों से ग्रहों का प्रेक्षण कर आंकड़ों का संग्रहण किया । इन आंकड़ों के आधार पर उनके सहायक जोहान्नेस केप्लर ( 1571 - 1640 ) ने तीन नियमों का प्रतिपादन किया , जिन्हें केप्लर के नियम कहते हैं ।
उपर्युक्त गद्यांश का अध्ययन कीजिए एवं प्रश्नों के उत्तर दीजिए -
( ii ) केप्लर का प्रथम नियम क्या है ?

लिखित उत्तर

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केप्लर के प्रथम नियमानुसार प्रत्येक ग्रह सूर्य के परितः दीर्घवृत्तीय कक्षा में परिक्रमा करता है और सूर्य इसकी एक नाभि पर होता है।
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