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Class 11
PHYSICS
साम्यावस्था में किसी गैस का घनत्व और दाब...

साम्यावस्था में किसी गैस का घनत्व और दाब अपने सम्पूर्ण आयतन में एकसमान है। यह पूर्णतया सत्य केवल तभी है जब कोई भी बाह्य प्रभाव न हो। उदाहरण के लिए , गुरुत्व से प्रभावित किसी गैस स्तंभ का घनत्व ( और दाब ) एकसमान नहीं होता है। जैसा की आप आशा करेंगे इसका घनत्व ऊंचाई के साथ घटता है। परिशुद्ध निर्भरता ' वातावरण के नियम`n_(2)=n_(1) "exp" [ - (mg)/(k_(B)T)(h_(2)-h_(1))]` से दी जाती है , यहाँ `n_(1),n_(2)` क्रमशः`h_(1)` व `h_(2)`ऊँचाइयों पर संख्यात्मक घनत्व को प्रदर्शित करते है। इस संबंध का उपयोग द्रव स्तंभ में निलबिंत किसी कण के अवसादन साम्य के लिए समीकरण`n_(2)=n_(1)" exp"[-(mgN_(A))/(rhoRT)(rho-rho')(h_(2)-h_(1))]` को व्युत्पन्न करने के लिए कीजिए , यहाँ `rho` निलंबित कम का घनत्व तथा `rho' `चारो तरफ के माध्यम का घनत्व है। `N_(A)` एवोगेड्रो संख्या तथा R सार्वत्रिक गैस नियतांक है।

लिखित उत्तर

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निलंबित कण के आभासी भार को जानने के लिए आर्किमिडीज के सिद्धांत का उपयोग कीजिए।
`W = mg = 4/3 pir^(3) .rho g`
जहाँ कण r की त्रिज्या तथा `rho` उसका घनत्व है। द्रव द्वारा कण पर ऊपर की और उत्प्लावन बल लगाया जाता है जिसका मान कण के द्वारा हटाए गए द्रव के भार के बराबर होता है ( आर्किमिसडीज के सिद्धांत से )। इस प्रकार उत्प्लावन बल
`B = 4/3 pir^(3).rho'g`
जहाँ `rho` द्रव का घनत्व है।
अतः निलंबित कण पर नीचे की और लगने वाला परिणामी बल
`F = W-B = 4/3 pir^(3) rho g - 4/3 pir^(3)rho'g`
` = 4/3 pir^(3) (rho - rho) g" "`...(2)
वातावरण नियम से
`n_(2)=n_(1)"exp"[(-mg)/(k_(B)T)(h_(2)-h_(1))]" "...(3)`
जहाँ `n_(1)` व `n_(2)`क्रमशः `h_(1)`व `h_(2)` ऊँचाइयों पर संख्यात्मक घनत्व है। समीकरण (3 ) में mg के स्थान पर परिणामी बल F को प्रतिस्थापित करने पर ,
`n_(2) =n_(1)"exp"[(-F)/(k_(B)T)(h_(2)-h_(1))]`
समीकरण(2) में मान रखने पर
`n_(2)=n_(1)"exp" [ (4/3pir^(3)(rho-rho')g)/(k_(B)T)(h_(2)-h_(1))]`
`=n_(1)"exp"[ (-4/3pir^(3)rhog(rho-rho'))/(rhok_(B)T)(h_(2)-h_(1))]`
समीकरण ( 1 ) में मान रखने पर
`n_(2) = n_(1) exp [ (-mg(rho-rho'))/(rhok_(B)T)(h_(2)-h_(1))]" " ...(4)`
किन्तु बोल्ट्जमैन नियतांक `k_(B)=R/(N_(A)`
जहाँ एवोगेड्रो `N_(A)` संख्या तथा R सार्वत्रिक गैस नियतांक है। समीकरण (4 ) में मान रखने पर
`n_(2)=n_(1)"exp"[ (-mg(rho-rho')N_(A))/(rhoT)(N_(A))/R (h_(2)-h_(1))]`
या `n_(2) =n_(1)"exp"[(-mgN_(A)(rho-rho'))/(rhoRT)(h_(2)-h_(1))]`
यही निलंबित कण के अवसादन साम्य के लिए समीकरण है।
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