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BIOLOGY
परागकोष की संरचना का सचित्र वर्णन कीजिए।...

परागकोष की संरचना का सचित्र वर्णन कीजिए।

लिखित उत्तर

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परागकोष की संरचना (Structure of Pollen Sac) पुंकेसर (Stamen) का अग्र फूला हुआ भाग परागकोष (Anther) कहलाता है। इसमें दो समान्तर, एक समान, लगभग बेलनाकार दो पराग पालियाँ (Pollen lobes) होती हैं। दोनों पालियाँ सामने की ओर एक गहरे खाँच द्वारा अलग होती हैं। पीछे की ओर ये मोटी पट्टी जो बंध्य (Steril) तथा संवहन (Vascular) ऊतक की बनी होती हैं, से जुड़ी होती है। इसे योजी (Connective) कहते हैं दो पालियों वाले परागकोष को द्विकोष्ठी (Bithecous) कहते हैं।
प्रत्येक परागकोष पाली में प्राय: दो प्रकोष्ठ (Chambers) होते हैं जिन्हें परागधानी (Pollen sac = Microsporangia) कहते हैं। इनके अन्दर लघु बीजाणुजनन (Microsporognosis) द्वारा अगुणित लघुबीजाणुओं (Microspores) या परागकणों (Pollen grains) का निर्माण होता है। इस प्रकार प्रत्येक परागकोष में चार परागधानियाँ (Microsporangia) होती है। एक पाली की दोनों परागधानियाँ आन्तरिक रूप से बंध्य ऊतक से बनी एक पट्टी से आपस में अलग होती हैं। बाहर से देखने पर ये एक छिछले खाँच जैसी दिखती हैं।

नवजात परागकोष की अनुप्रस्थ काट में परागकोष को मुख्य तीन भागों में विभेदित किया जा सकता है-1. भित्ति (Wall), 2. बीजाणुधानियाँ (Microsporangia) तथा 3. संवहन ऊतक (Vascular tissue)
1. पराग कोष भित्ति (Anther wall) : यह बाहर से अन्दर की ओर क्रमशः चार परतों की बनी होती है। ये परतें निम्न प्रकार हैं
(i) बाह्यत्वचा (Epidermis)—यह सम्पूर्ण परागकोष को आवरित करने वाली एक कोशिका मोटी बाह्यतम परत होती है। परिपक्व परागकोष में यह परत सूखकर चपटी हो जाती है।
(ii) अन्तस्थीसियम (Endothecium): यह स्तर बाह्यत्वचा के ठीक नीचे स्थित होता है। यह स्तर एक कोशिका मोटा होता है। इसकी कोशिकाएँ मोटी एवं त्रिज्यत: दीर्घित होती हैं, इन कोशिकाओं की आन्तरिक स्पर्शरखीय भित्तियों में सैल्युलोज के जम जाने से U आकार की पट्टियाँ बन जाती हैं।
(iii) मध्य स्तर (Middle layer) : अन्तस्थीसियम के अन्दर की ओर 1-3 कोशिका मोटा मध्यस्तर पाया जाता है। ये कोशिकाएँ पतली भित्ति वाली एवं अल्पकालिक होती हैं।
(iv) टेपीटम (Tapetum) : यह परागकोष भित्ति का सबसे आन्तरिक एवं विशिष्ट स्तर है एवं बीजाणुजन ऊतक के चारों ओर एकल स्तर के रूप में पाया जाता है। इसकी कोशिकाएँ स्वभाव के आधार पर दो प्रकार की होती हैं-अमीबाभ तथा ग्रन्थिल कोशिकाएँ।
2. बीजाणुधानियाँ (Microsporangia)-द्विपालित परागकोष में चार बीजाणुधानियां पायी जाती हैं जो टेपीटम स्तर द्वारा घिरी होती है। प्रारम्भ में बीजाणुधानी के अन्दर समांग बीजाणुजन ऊतक भरा होता है जो विकास के साथ लघु बीजाणुओं अथवा परागकणों का निर्माण करता है। 3. संवहन ऊतक (Vascular tissue) : पराग पालियों के बीच में संवहनी ऊतक उपस्थित होता है जिसका सम्बन्ध पुतंतु से होता है। यह परागकोष को पोषण एवं जल उपलब्ध कराता है।
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