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BIOLOGY
आवृतबीजी पादप में नर युग्मकोद्भिद् के पर...

आवृतबीजी पादप में नर युग्मकोद्भिद् के परिवर्धन का सचित्र वर्णन कीजिए।

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आवृतबीजी पादप में नर युग्मकोद्भिद् का परिवर्धन(Development of Male Gametophyte in Angiospermic plants) लघुबीजाणु (Microspore), नर युग्मकोद्भिद् (Male gametophyte) की प्रथम कोशिका होती है। यह गाढ़े जीवद्रव्य (Dense protoplasm) एवं स्पष्ट केन्द्रक (Cleny nucleus) युक्त होती है। चतष्क से पृथक होते ही इसका आकार तीव्रता से बढ़ता है। कोशिकाद्रव्य एक पतली परिधीय झिल्ली के रूप में दिखाई देता है एवं इसमें अनेक रसधानियाँ (Vacuoles) उत्पन्न हो जाती हैं। नर युग्मकोद्भिद के विकास की कुछ अवस्थाएँ,परागण क्रिया से पूर्व तथा कुछ परागण क्रिया के बाद सम्पन्न होती हैं।
परागण से पूर्व लघुबीजाणु का केन्द्रक समसूत्री विभाजन (Mitosis) द्वारा विभाजित होकर एक बड़ा कायिक केन्द्रक (Vegetative nucleus) तथा एक छोटा जनन केन्द्रक (Generative nucleus) बनाता है। इन दोनों केन्द्रकों के बीच भित्ति निर्माण (Wall formation) से एक बड़ी कायिक कोशिका (Vegetative cell) तथा एक छोटी जनन कोशिका (Generative cell) बन जाती है। अधिकांश पादपों में प्राय: परागकण की इसी द्विकोशिकीय अवस्था में परागण क्रिया (Pollination process) सम्पन्न होती है जिसमें परागकण परागकोषों से मुक्त होकर वर्तिकान (Stigma) तक पहुँचते हैं।

प्रारम्भ में जनन कोशिका परागकण की भित्ति से संलग्न रहती है, परन्तु अपनी भित्ति का निर्माण पूर्ण करने के पश्चात् परागकण की भित्ति से पृथक हो जाती है तथा कायिक केन्द्रक की ओर अग्रसर होती है। परागकण की भित्ति से पृथक होने पर जनन कोशिका का आकार चपटा हो जाता है जो बाद में मसूरादार (Lontcular), दीर्घवृत्ताकर (Eleptical), कृमिरुपी (Wormiform) अथवा तर्कुरुपी (Fusiform) हो सकती है।
इससे आगे का विकास परागण के पश्चात् होता है। वर्तिकान से जल एवं पोषक पदार्थ अवशोषित करके ट्यूब कोशिका (Tube cell) फूल जाती है और परागण के किसी एक जनन छिद्र से परागनली (Pollen tube) के रूप में बाहर आती है। परागनली वर्तिका में रास्ता बनाती हुई आगे बढ़ती है। पराग नलिका के अग्रस्थ सिरे पर कायिक कोशिका का केन्द्र होता है तथा इसके पीछे जनन कोशिका होती है। यहीं पर जनन कोशिका में सूत्री विभाजन होता है जिससे दो कोशिकाएँ बन जाती हैं जो दो नर युग्मकों के रूप में कार्य करती हैं। प्रत्येक नर युग्मक एक कोशिकीय, अचल अगुणित व एककेन्द्रकी होता है।
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