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BIOLOGY
आवृत्तबीजी पादपों में भ्रूण परिवर्धन का ...

आवृत्तबीजी पादपों में भ्रूण परिवर्धन का सचित्र वर्णन कीजिए।

लिखित उत्तर

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आवृत्तबीजी पादपों में भ्रूण का परिवर्धन (Embryo development in Angiospermic plants)-भ्रूण विकास की प्रारम्भिक अवस्थाएँ द्विबीजपत्री तथा एकबीजपत्री पौधों में समान होती हैं। दोनों प्रकार के पौधों में युग्मनज (Zygote) अनुप्रस्थ विभाजन द्वारा दो कोशिकीय प्राक्भ्रूण (Proembryo) बनाते हैं। इसकी बीजाण्डद्वारी कोशिका आधारीय कोशिका (Basal cell) तथा भ्रूणपोष की ओर की कोशिका शीर्ष कोशिका (Terminal cell) या भ्रूणीय कोशिका कहलाती है।
द्विबीजपत्री भ्रूण का विकास (Development of dicot embryo)-भ्रूण परिवर्धन का अध्ययन सर्वप्रथम हेन्सटीन (Honstein, 1840) ने द्विबीजपत्री पौधे कैप्सेला बर्सा पेस्टोरिस (Capsella bursa pestoris) में किया था। सामान्यत: निषेचन के समय भ्रूणकोष में एक नर युग्मक अण्डकोशिका से संयोजित होकर द्विगुणित युग्मनज का निर्माण करता है। युग्मनज में प्रथम विभाजन अनुप्रस्थ होता है जिसके फलस्वरूप एक शीर्षस्थ कोशिका (Apical cell) तथा एक आधारीय कोशिका (Basal cell) बनती हैं। शीर्षस्थ कोशिका निभाग (Chalaza) की ओर तथा आधारीय कोशिका बीजाण्डद्वार (Meiropyle) की ओर स्थित होती है। सीर्थस्थ कोसिका में अनुवैळणा आभागीय कोशिका में अनुमाण विभाजन लगभग साथ-साथ होते हैं। अनुदैर्ध्य विभाजन से निर्मित दोनों शीर्ष कोशिकाओं में पुन: पूर्व विभाजन के लम्बवत् अनुदैर्ध्य विभाजन होता है जिससे चार कोशिकाओं का चतुष्टांश (Quadrant) बनता है। इस चतुष्टांश में पुनः एक अनुप्रस्थ विभाजन होने से एक अष्टांशक (Octant) बनता है अष्टांशक की प्रत्येक कोशिका में परिनतिक विभाजन होने से एक आठकोशिकीय बाह्य परत बाह्यत्वचाजन (Dermatogen) तथा एक आठ कोशिकीय आन्तरिक परत बनती है। बाह्यत्वचाजन अनेक अपनतिक विभाजनों द्वारा भ्रूण की बाह्यत्वचा (Epidermis) बनाती हैं। आन्तरिक कोशिकाओं से बीजपत्राधार (Hypocotyl), बीजपत्र के भरण विभज्योतक (Ground meristem) तथा प्राक्एधा तन्त्र (Procambial system) बनते हैं। आधारीय कोशिका अनेक अनुप्रस्थ विभाजनों के फलस्वरूप सात से दस कोशिकीय लम्बा निलम्बक (Suspensor) बनाती है। निलम्बक की अन्तिम कोशिका फूलकर चूषकांग कोशिका (Haustarial cell) बनाती है, जो भ्रूणपोष से पोषक पदार्थों के अवशोषण का कार्य करती है। निलम्बक के भ्रूणीय सिरे की ओर स्थित कोशिका अधःस्फीतिका (Hypophysis) कहलाती है जो मूलांकुर (Radicle) के साथ मूलांकुर शीर्ष बनाती है।

शीर्ष कोशिका के विभाजन के फलस्वरूप बनी कोशिकाओं में निरन्तर विभाजनों के बाद भ्रूण पहले गोलाकार व बाद में हृदयाकार हो जाता है। इसमें दो पालियों का निर्माण होने लगता है। जो बीजपत्रों (Cotyledons) में विकसित हो जाता है। पालियों के बीच स्थित खाँच के आधारीय भाग से प्रांकुर (Plumule) का विकास होता है। इसलिए भ्रूण में प्रांकुर की स्थिति शीर्षस्थ एवं बीजपत्रों की स्थिति पाश्र्वीय होती है।
परिपक्व भ्रूण को दो बीजपत्रों तथा भ्रूणीय अक्ष में विभेदित किया जा सकता है। भ्रूण अक्ष का बीजपत्रों के स्तर से ऊपर का भाग बीजपत्रोपरिक (Epicotyl) तथा नीचे का भाग बीजपत्राधार (Hypocotyl) कहलाता हैं बीजपत्रोपरिक के शीर्ष पर प्रांकुर (Plumule) स्थित होता है। बीजपत्रों में भोजन संचित रहता है जो बीजांकुरण के समय नवोद्भिद् को स्थापित करने के लिए प्रयुक्त होता है।
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