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BIOLOGY
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टिप्पणी लिखिए: (अ) संवेदी तंत्रिकाएं, (ब) प्रेरक तन्त्रिका (स) स्सक्रिय विभव, (द) स्थिर विभव (य) तन्त्रिका आवेग।

लिखित उत्तर

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(अ) असंगतता या अनिषेच्यता (Incompatibility) पूर्णतया कार्यक्षम (Functional) एवं जननक्षम (Fertile) नर एवं मादा युग्मकों के मध्य निषेचन (Fertilization) में विफलता को असंगतता अथवा अनिषेच्यता कहते हैं। यह दो प्रकार की होती है-
(i) अन्तरजातीय अनिषेच्यता (Interspecific incompatibility) जब अनिषेच्यता एक ही वंश की विभिन्न जातियों के बीच होती है तब इसे अन्तरजातीय अनिषेच्यता कहते हैं।
(ii)आन्तरजातीय अनिषेच्यता (Interaspecific incompatibility)जब अनिषेच्यता एक ही जाति के सदस्यों के बीच होती है तो इसे आन्तरजातीय अनिषेच्यता अथवा स्वअनिषेच्यता अथवा स्वबन्धता कहते हैं। उदाहरण—प्रिमुला (Primula)|
(ब) बीज का विकास (Development of seed)-पुष्पीय पादपों में द्विनिषेचन के पश्चात् भ्रूणकोष में भ्रूण तथा भ्रूणपोष का परिवर्धन होता है। इसके साथ-साथ ही अण्डाशय एवं बीजाण्ड में कुछ परिवर्तन होते हैं जिससे बीजाण्ड, बीज के रूप में विकसित होता है। बीजाण्ड के दोनों अध्यावरणों से बीजावरण बनते हैं। बाह्य बीजावरण से बाह्य बीज चोल या टेस्टा (Testa) तथा अन्त: अध्यावरण से अन्तः बीजचोल टेगमेन (Tegmen) बनता है। बीजाण्डवृन्त, बीजवन्त में परिवर्तित हो जाता है। नाभिका. बीजाण्डद्वार, रैफी एवं निभाग में विशेष परिवर्तन प्रदर्शित नहीं होते हैं। इनके ऊतकों में परिपक्वता आ जाती है। बीजाण्डकाय प्राय: भ्रूणपोष परिवर्धन के समय उपयोग में आ जाता है। कुछ पादपों में यह भ्रूणपोष के परितः एक पतली परत परिभ्रूणपोष (Perisperm) के रूप में पाया जाता है। यूफोर्बिएसी कुल के कुछ पौधों जैसे अरण्ड के बीजाण्डद्वार वाले छोर पर सफेद रंग की संरचना कैरंकल (Caruncle) पायी जाती है। अधिकांश एकबीजपत्री पादपों में बीजाण्डद्वार वाले सिरे पर एक प्लगनुमा संरचना पायी जाती है जिसे ऑपरकुलम कहते हैं।
(स) फल का विकास (Development of Fruit)-पुष्पी पादपों में निषेचन के पश्चात् अण्डाशय का विकास फल (Fruit) के रूप में होता है। बीजाण्ड एवं अण्डाशय में हामोंन संश्लेषण होता है जिसके प्रभाव से अण्डाशय भित्ति (Ovary wall), फलभित्ति (Pericarp) में परिवर्तित हो जाती है। ऐसे फल जो केवल अण्डाशय से विकसित होते हैं, सत्य फल (True fruits) कहलाते हैं। जैसे-आम, अमरूद आदि। कुछ फलों के विकास में अण्डाशय के साथ-साथ, पुष्पासन एवं अन्य पुष्पीय भाग भी सम्मिलित होते हैं, ऐसे फलों को आभासी फल (असत्य फल, False fruit) कहते हैं। जैसे-सेब, नाशपाती आदि। कभी-कभी अण्डाशय बिना निषेचन के ही फल में विकसित हो जाता है, जिसे अनिषेकफल (Parthenocarpic fruit) कहते हैं। इन फलों में बीजों का निर्माण नहीं होता है। जैसे-पपीता, केला, अंगूर आदि।
(द) पीढ़ी एकान्तरण (Alternation of Generation) आवृतबीजी पौधों के जीवन चक्र में दो स्पष्ट प्रावस्थाएँ, बीजाणुद्भिद् (Sporophyte) तथा युग्मकोदभिद (Gametophyte) एक-दूसरे के एकान्तर क्रम में आती हैं। बीजाणुद्भिद् अवस्था लम्बी अवधि की मुख्य अवस्था है जो युग्मनज (Zygote) से विकसित होती है। यह द्विगुणित (2n) होती है और मूल, स्तम्भ एवं पत्तियों में विभेदित की जा सकती है। कायिक वृद्धि के पश्चात् इसमें जनन प्रवस्था आती है। बीजाणुद्भिदी पादप पुष्प धारण करता है जो लैंगिक जनन में भाग लेते हैं। नर जननांग, पुंकेसर के पराग कोश में अर्धसूत्री विभाजन द्वारा लघुबीजाणुओं का निर्माण होता है जो अंकुरित होकर नर युग्मकोद्भिद् का विकास करते हैं। इसी प्रकार मादा जननांग, जायांग के अण्डाशय में उपस्थित बीजाण्ड में अर्द्धसूत्री विभाजन द्वारा गुरुबीजाणुओं का निर्माण होता है जिनमें से एक गुरुबीजाणु द्वारा मादा युग्मकोद्भिद् बनता है। नर और मादा युग्मकोद्भिद् अगुणित (Haploid, n) प्रावस्थाएँ हैं, जो पूर्णत: बीजाणुद्भिद् पर आश्रित होती हैं। ये बीजाणुद्भिद् की तुलना में अल्प अवधि की तथा अनाकर्षक होती हैं। भ्रूणपोष में अण्डकोशिका बनती है जोकि मादा युग्मक होता है। नर और मादा युग्मकों के संलयन से द्विगुणित युग्मनज (2n, zygote) बनता है, जो बीजाणुद्भिद् की प्रथम कोशिका है, इसी से पुन: बीजाणुद्भिद् का विकास प्रारम्भ होता है। इस प्रकार आवृतबीजी पादपों के जीवन चक्र में द्विगुणित (बीजाणुद्भिद्) व अगुणित (युग्मकोद्भिद्) प्रावस्थाएँ एक के बाद एक एकान्तर क्रम में आती हैं, जिसे पीढ़ी एकान्तरण कहते हैं।
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