जैव प्रौद्योगिकी के कार्यक्षेत्र एवं महत्त्व (Seope and Importance of Biotechnology)
मानव जीवन के अनेक क्षेत्र प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष रूप से जैव प्रौद्योगिकी द्वारा प्रभावित है। जैव प्रौद्योगिकी का कार्यक्षेत्र सूक्ष्मजोबों से लेकर पर्यावरण व मानवकल्याण तक विस्तृत है। मानव कल्याण व पर्यावरण संरक्षण से सम्बन्धित जैव प्रौद्योगिकी के कुछ महत्वपूर्ण कार्यक्षेत्र निम्नानुसार है-
1. चिकित्सा के क्षेत्र में - वर्तमान युग में जैव प्रौद्योगिकी का उपयोग चिकित्सा के क्षेत्र में बहुत महत्त्वपूर्ण है । चिकित्सा के क्षेत्र में किए गए प्रयासो व अनुप्रयोगों को निम्न सारणी में प्रस्तुत किया गया है -
2. कृषि क्षेत्र में जैव प्रौद्योगिकी - जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान द्वारा पौधों की नई प्रजातियाँ तैयार करके पौधों की पोषण क्षमता और उत्पादन में वृद्धि की गयी है। कृषि क्षेत्र में जैव प्रौद्योगिकी की उपलब्धियाँ निम्न हैं-
1. रोग प्रतिरोधक प्रजातियों का उत्पादन एवं विकास
2. कीट, कवक, प्रतिरोधक प्रजातियों का उत्पादन एवं विकास
3. वातावरणीय परिस्थितियों जैसे-सूखा, मृदा अवस्था के लिए प्रतिरोधक प्रजातियों का विकास
4. पौधों की पोषण क्षमता में वृद्धि
5. परागकोश संवर्धन द्वारा अगुणित पौधे तैयार करना
6. पौधों में और मृदा में नाइट्रोजन स्थिरीकरण की क्रिया को बढ़ाना।
7. जैव उर्वरकों की खोज
8. पौधों से प्राप्त रासायनिक उत्पादों को बढ़ाना
3. पादप जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में - जैव प्रौद्योगिकी तकनीक की सहायता से पादपों के गुणन, संरक्षण, फरसल सुधार तथा वांछित उपापचयों के उत्पादन हेतु अनेकों विधियाँ विकसित की गयी हैं जिनमें से कुछ महत्त्वपूर्ण विधियाँ व उनके उपयोग निम्नलिखित सारणी में दर्शाये गए हैं।
4. जन्तु जैव प्रौद्योगिकी केक्षेत्र में - रोजलिन संस्थान, स्कॉटलैण्ड के वैज्ञानिक इआन विल्मुट (Ian Wilmut) को एक छ: वर्ष आयु की फिन्न डोरगेट भेड़ की स्तन कोशिका से पृथक केन्द्रक का स्कॉटिस ब्लेक फेस भेड़ की अण्ड कोशिका (केन्द्रक रहित) से संयुग्मन द्वारा 5 जुलाई 1996 में स्तनधारी के प्रथम क्लोन विकसित करने में सफलता प्राप्त हुयी। विल्मुट द्वारा समाचार माध्यमों में इसकी घोषण 22 फरवरी 1997 में की गई थी तथा भेड़ के इस क्लोन का नाम डॉली रखा गया था ईआन विल्मुट की इस सफलता जन्तु क्लोनिग के क्षेत्र में अनेकों नई संभावनाओं को खोल दिया। अब तक लगभग 20 से अधिक जन्तु जातियों के वांछित लक्षणों वाले उपयोगी जन्तुओं के क्लोन विकसित करने में वैज्ञानिकों को सफलता प्राप्त हो चुकी है।
5. व्यावसायिक महत्त्व की सामग्री के उत्पादन में - ऊतक संवर्धन तकनीक द्वारा अनेक प्रकार के व्यावसायिक रूप से महत्त्वपूर्ण पदार्थों जैसे-ऐल्कोहल, ऐसीटोन, ग्लिसरॉल, विभिन्न प्रकार के कार्बनिक अम्लों, विटामिन्स, एन्जाइम्स, एकल कोशिका संवर्धन द्वारा प्रतिजैविक, बायोगैस आदि का उत्पादन किया जाता है। कोशिका संवर्धन की बायोरूपान्तरण तकनीक द्वारा कम उपयोगी उत्पादों को अधिक उपयोगी उत्पादों में परिवर्तित किया जा सकता है। जीवाणुओं के चुने हुए व रूपान्तरित प्रभेदों का उपयोग वाहितमल (Sewarce) उपचार, औद्योगिक
6. पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में ईकाइयों के बहि्ावों में उपस्थित विषैले (ai परदार्थों के विराविषन (Detoxification), खनिज तेलों के विघटन आदि के लिये किया जाता है। आनन्द मोहन चक्रवोर्ती द्वारा खोजा गया स्यूडोमोनास प्यूटिडा का प्रभेद, जिसे सुपर बग कहते हैं, के द्वारा तीन चौथायी तेल-प्रदूषण का नियन्त्रण सम्भव है।
