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Class 12
BIOLOGY
मॉस का विस्तृत विवरण दीजिए।...

मॉस का विस्तृत विवरण दीजिए।

लिखित उत्तर

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ब्लाटिंग तकनीक में DNA टुकड़ों को अगारोज जैल को प्राप्त करने के पश्चात (जैल इलेक्ट्रोफोरेसिस) द्वारा इन्हें नाइट्रोसेल्यूलोज फिल्टर (Nitrocellulose) पर स्थानान्तरित कर स्थिर किया जाता है। फिर इन्हें DNA प्रोब्स द्वारा संकरण से पहचाना जाता है। यह प्रक्रिया ब्लाटिंग तकनीक (Blotting Technique) कहलाती है। सर्वप्रथम वर्ष 1975 में ई.एम सदर्न (EM. Southern) द्वारा डी.एन.ए. खण्डों को नाइट्रोसेल्यूलोज (Nitrocellulose) फिल्टर पर स्थानान्तरित किया जाता है। इस तकनीक को सदर्न ब्लाटिंग तकनीक कहा जाता है। इस तकनीक द्वारा डी.एन.ए. खण्डों का विश्लेषण किया जाता है।
आल्विन ने वर्ष 1979 में RNA खण्डों को जैल इलेक्ट्रोफोरेसिस के पश्चात नाइट्रोसेल्यूलोज फिल्टर के स्थान पर अमीनोबेन्जाइल ऑक्सीमिथाइल पत्र पर स्थानान्तरित किया इस तकनीक को नादर्न ब्लाटिंग तकनीक (Northern blotting technique) के नाम से जाना गया। नादर्न ब्लाटिंग तकनीक द्वारा RNA खण्डों का विश्लेषण किया जाता है। तौबिन व साथियों ने वर्ष 1979 में सर्वप्रथम फ्रेटीन को सोडियम डोडिसाइल सल्फेट (Sodium-do-decyl sulphate) की सहायता से पालिपेप्टाइडों (Polypetides) में विलगित किया फिर इलैक्ट्रोफोरेसिस की मदद से अलग कर नाइट्रोसेल्यूलोज पेपर या नाइलोन झिल्ली पर स्थानान्तरित किया तथा प्रोटीन की पहचान एक्स-रे प्लेट पर उद्भाषित कर की। इस तकनीक द्वारा प्रोटोनों का विश्लेषण किया जाता है। इसको वेस्टर्न ब्लॉटिंग कहते हैं।
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