अफीम, अहिफेन, अमल (0pium, Opium Poppy)
अफीम जिसका वानस्पतिक नाम-पैपेवर सोम्नीफेरम (papaver somniferum) है, जो कि
कुलपपावरसा (Papaicraceae) का एक महत्वपूर्ण सदस्य है। इसके उपयोगी पादप भाग के दो तरह से प्रयोग में लाया जाता है। 1. अपरिपक्व कैप्सूल फलों का लैटेक्स (अफीम), 2. बीज-पोस्तदाना, खसखस के रूप में।
अफीम का पादप एकवर्षी, अशाखित, उध्ध्व, 1-3 फीट लम्बा कृष्ट पादप है। अफीम की पत्तियाँ- बड़ी, एकान्तर, पालिवत, अवृन्त, पुष्पक्रम-एकल अंतस्थ, पुष्प काफी बड़े, आकर्षक, सफेद या बैंगनी होते हैं। इनके दल शीघ्र झड़' जाते हैं।
अफीम का फल-कैप्सूल, बड़ा, गोल, कपाटों से स्फुटित होता है जिसमें असंख्य, वृक्काकार, सूक्ष्म, सफेद, तेलीय, खाने योग्य बीज होते हैं जिन्हें खसखस भी कहते हैं।
अफीम को एशिया माइनर का मूल पादप माना जाता है। आजकल आस्ट्रेलिया, चैकोस्लोवेकिया, म्यांमार, हंगरी, भारत, पाकिस्तान, ईरान तथा तुर्की में इसकी खेती की जाती है। भारत में राजस्थान इसका प्रमुख उत्पादक राज्य है। इसके अलावा उत्तर-प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश इसके उत्पादक राज्य हैं। इसकी खेती शीत ऋतु में की जाती है।
1000 पौधे से लगभग 30-50 ग्राम अफीम प्राप्त होती है।
अफीम में पाये जाने वाले 25 से अधिक प्रकार के ऐल्केलॉर्स में प्रमुख मार्फीन, कोडीन, थीबेन, नारकोटीन, पेपावेरीन, ऑपियानिन के अतिरिक्त गोंद, रेजिन, मेकोनिक अम्ल भी होते हैं।
औषधि के रूप में अफीम के निम्नांकित प्रमुख उपयोग हैं-
1. अफीम शामक (Sedative), प्रति उद्वेष्ठी (Antispasmodic), वेदनाहर (Anodyne), स्वेदक ( Sundorific), (Norcotic) तथा सम्मोहक (Hypnotic) होता है।
2. मार्फीन एक तीव्र दर्द निवारक (Analgesic) के रूप में शारीरिक दर्द व ऐंठन के उपचार में प्रयोग होता है।
3. कोडीन से खाँसी का इलाज किया जाता है।
4. अतिसार तथा दस्तों में उपयोगी होने के कारण इसका नाम अमल भी है।
5. यह नींद लाने वाला व स्वापक है।