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BIOLOGY
जैविक कृषि (Organic Agriculture) का आर्थ...

 जैविक कृषि (Organic Agriculture) का आर्थिक एवंपारिस्थितिक महत्व समझाइये।

लिखित उत्तर

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जैविक कृषि का आर्थिक एवं पारिस्थितिक महत्व
(i) जैविक कृषि एक अत्यन्त ही सस्ती तथा सरल विधि है, जिसकाप्रयोग छोटे किसान भी कर सकते हैं।
(ii) जैविक कृषि के अन्तर्गत किये गये जैव उर्वरकों के प्रयोग से मृदाकी जल धारिता तथा वायु संचार बढ़ जाता है।
(iii) जैव उर्वरकों के प्रयोग से मृदा का तापमान, pH आदि नियन्त्रितरहता है, जिससे मृदा में जीवाणु क्रियाशील बने रहते हैं।
(iv) जैविक कृषि से भूमि में रसायनों की विषाक्तता कम होती है। जिससेपर्यावरण सन्तुलन बना रहता है।
(v) इसके द्वारा ऊसर भूमि में भी सुधार होता है। इसमें सड़ने-गलने सेकार्बनिक अम्ल पैदा होते है जो भूमि की क्षारीयता को कम देते हैं।
(vi) यह प्रदूषण उत्पन्न नहीं होने देती है तथा इससे मृदा की उर्वराशक्ति पर भी कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता है।
(vii) जैविक कृषि द्वारा मृदा में होने वाले कटाव को रोका जा सकता है।
(viii) जैव उर्वरकों के उपयोग से मृदा में संतुलित पोषक तत्व प्राप्त होते हैंजो मृदा की उर्वरा शक्ति को बढ़ाते हैं।
(ix) जैविक कृषि द्वारा मृदा की उर्वरता लम्बे समय तक बनी रहती है,इस प्रकार उत्पादन दीर्घकाल तक बढ़ता रहता है।
(x) जैव उर्वरकों का उपयोग होना अत्यन्त आवश्यक हो गया है, इसकेनिरन्तर उपयोग से फसल की लागत बहुत कम आती है। अत: आर्थिक लाभ प्राप्त होता है।
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