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BIOLOGY
गोबर गैस निर्माण प्रक्रिया को समझाइये।...

गोबर गैस निर्माण प्रक्रिया को समझाइये।

लिखित उत्तर

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पशुओं से प्राप्त गोबर का सदुपयोग जैविक खाद बनाने तथा गोबर गैस के निर्माण में किया जाता है। गोबर से उत्तम खाद बनाने के लिये इसे उपयुक्त आकार के गड्ढों में नियमित रूप से भरा जाता है। इन गड्ढों को ऊँचाई पर बनाया जाता है तथा इनकी गहराई एक मीटर से ज्यादा नहीं रखी जाती है। <.br> जीवाणुओं द्वारा इन कार्बनिक पदार्थों का किण्वन (Fermentation) प्रक्रिया होती है, जिससे जो गैस उत्पादित होती है ही गोषरगैरापालापीपाला गोपी-पापा-ति गोरा ही प्रयोग होता ही कई गाँवों में तो गोबर गैस संयंत्र संचालित किये जा रहे है। गोबर गैस संयंत्रों में अवायवीय किण्वन तीन चरणों में पूरा होता है-
1. प्रथम चरण में अवायवीय विकल्पी जीवाणु जटिल 'कानिक' पदार्थों जैसे सेलुलोस, हेमीसेलुलोस को सरला पदार्थों में अपघटित कर देते हैं।
2. द्वितीय चरण में जीवाणु वायवीय व आंशिक अवायवीय किण्वन द्वारा सरल पदार्थों को पहले कार्बनिक अम्लों में तथा अन्त में एसीटिक अम्ल में परिवर्तित कर देते हैं।
3. तीसरे चरण में मीथेनोबेक्टीरियम द्वारा ऐसीटिक अम्ल को मीथेन में आक्सीकृत कर दिया जाता है। संयंत्र में शेष बचे पदार्थ “स्लरी" को सुखाकर इसका उपयोग खाद के रूप में किया जा सकता है।
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