मानव के शुक्राणु को तीन भागो में व्यक्त किया जाता हैं-
,(i)शीर्ष(Head)- मानव शुक्राणु के शीर्ष भाग का निर्माण केन्द्रक तथा एक्रोसोम के द्वारा होता हैं। एक्रोसोम शुक्राणु के अग्र भाग पर केन्द्रक तथा प्लाज्मा झिल्ली के मध्य उपस्थित होता है। अम्लीय प्रोटीन एन्टी- फर्टिलाइजिन शुक्राणु के शीर्ष पर पाया जाता हैं तथा इनके अन्दर स्पर्म लेजिन एन्जाइम जैसे -हायल्यूरोनिडेज एवं कैथरिसान्स पाये जाते हैं।
,(ii) मध्य खंड(Mid peice)- शुक्राणु का मघ्य खंड, शीर्ष भाग से ग्रीवा द्वारा जुड़ा रहता हैं। इसमें दो तारककेंद्र होते हैं जिनके कार्य अलग-अलग होते हैं। इनमें उपस्थित समीपस्ठ तारककेंद्र निषेचन के बाद माइटोटिक तुर्क के िर्माण में सहायता करता हैं। इसकी स्थिति मुख्य अक्ष पर लम्ब्वत होती हैं । जबकि दूररस्थ तारककेंद्र शुक्रणु के अक्ष का निर्माण करता हैं । इनमें उपस्थित अक्षीय तन्तु रचना में कशाभिक के सामान 9+2 प्रकार की होती हैं । इनमे दूरस्थ तारक केंद्र का एक महत्वपूर्ण कार्य यह होता है की वह आधार के का कार्य भी करती हैं । मध्य खंड में माइटोकॉन्ड्रिया आपस में मिलकर फीते के सामान नेबेकर्ण का निर्माण करती हैं। जबकि कोशिका द्रव्य की पतली मैंनचेट का निर्माण करती है
,(iii) पूँछ(tail)- यहशुक्राणु का सबसे लम्बा भाग होता हैं । इसका जो अंतिमं भाग होता हैं वह पूँछ का नुकीला भाग बनता है जबकि मुख्य खंड पूँछ का अधिकांश भाग बनता है। इसमें 9+2 रचना के अतिरिक्त कोशिका द्रव्य एवं मोटा तन्तु भी स्थित होता है।
