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BIOLOGY
प्रबलता या एपिस्टैसिस (Epistasis) प्रभाव...

प्रबलता या एपिस्टैसिस (Epistasis) प्रभाव का विस्तृत विवरण दीजिए।

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प्रबलता या एपिस्टैसिस (Epistasis)- यह प्रभाव जीन्स की परस्पर क्रिया के कारण होता है। प्रबलता में एक गुणसूत्र के एक स्थल पर स्थापित जीन जब उसी गुणसूत्र के दूसरे स्थल (Locus) पर स्थित जीन की अभिव्यक्ति को अवरुद्ध करता है तो दूसरे जीन की अभिव्यक्ति को अवरुद्ध करने वाले जीन को प्रबलक जीन या एपिस्टैटिक जीन (Epistatic gene) या संदमक जीन कहते हैं। जिस जीन के प्रभाव को अवरुद्ध किया जाता है, उसे अबल जीन या हाइपोस्टैटिक जीन (Hypostatic gene) कहते हैं।
प्रबल जीन प्रभावी या अप्रभावी होने से प्रबलता भी दो प्रकार की हो सकती है। `F_(2)` पीढ़ी का अनुपात जीन्स की संख्या पर निर्भर करता है।
1. प्रभावी प्रबलता (Dominant epistasis)– लेगहॉर्न (Leghorm) मुर्गों में रंग के लिए प्रभावी जीन C होता है। एक प्रभावी प्रबलक जीन I रंग की जीन C के प्रभाव को रोकता है। सफेद लेगहॉर्न मुर्गों का जीनोटाइप CCII होता है। इसमें रंग के लिए तो जीन उपस्थित होता है, किन्तु प्रबलन जान रग की अभिव्यक्ति का रोक लेता है। सफेद फ्लाइमाउथ, रॉक मुर्गों में जीनोटाइप ccii होता है। इसमें प्रबलन जीन नहीं होता है, किन्तु रंग के लिए भी कोई जीन नहीं होता है। अतः इसका रंग सफेद होता है। इन दोनों के बीच संकरण कराने पर `F_(1)` पीढ़ी का जीनोटाइप Ccli होता है तथा प्रबलन जीन I की उपस्थिति के कारण ये सभी सफेद रंग के होते हैं। F| पीढ़ी में अन्तःप्रजनन (Interbreeding) कराने पर `F_(2)` पीवी में सफेद व रंगीन मुर्गे 13 : 3 के अनुपात में प्राप्त होते हैं। केवल वे ही मुर्गे रंगीन होते हैं जिनमें प्रवलक जीन'1 न हो तथा कम-से-कम एक जीन रंग के लिए (C) होता है।
- 2. अप्रभावी प्रबलता (Recessive epistasis)- चूहे में सामान्य रंग ग्रे (भूरा या अगौटी—agouti) होता है जो प्रभावी जीन G के कारण है। काला रंग अप्रभावी जीन g के कारण होता है। जीन G तथा ए की अभिव्यक्ति को एक अप्रभावी जीन a रोकता है। प्रबलक जीन क्योंकि अप्रभावी है। अत: यह समयुग्मकी अवस्था (na) में ही अपना प्रभाव डाल पाएगा। यदि एक समयुग्मजी ग्रे रंग के तथा एक समयुग्मजी अप्रभावी सफेद चूहे के बीच संकरण कराया जाए, तब F1 पीढ़ी में सभी चूहे ग्रे रंग के होंगे। इन विषमयुग्मकी प्रे चूहों के बीच अन्तः प्रजनन कराने पर F2 पीढ़ी में ग्रे, काले या सफेद चूहे 9 : 3 : 4 के अनुपात में प्राप्त होते हैं। जिस चूहे में दो प्रबलक जीन aa होंगे वह सफेद होगा। जिस चूहे में एक भी G जीन होगा तथा प्रबलन जीन अनुपस्थित होगा (अर्थात् A जीन होगा) वह चूहा ग्रे रंग का होगा। अप्रभावी जीन g समयुग्मकी अवस्था में उपस्थित होने तथा प्रबलक जीन का प्रभावी ऐलील A उपस्थित होने पर चूहा काले रंग का होगा।
`F_(2)` अनुपात-9 ग्रे : 3 काले : 4 सफेद .
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