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BIOLOGY
पारिस्थितिक तंत्र में ऊर्जा के प्रवाह का...

पारिस्थितिक तंत्र में ऊर्जा के प्रवाह का सविस्तार वर्णन कीजिए।

लिखित उत्तर

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जनसंख्या वृद्धि वक्र (Population Growth Curve) - मानव अथवा अन्य जीवों की वृद्धि कर रही जनसंख्या एक निश्चित प्रतिरूप में वृद्धि करती है, जिसे जनसंख्या का वृद्धि वक्र कहते हैं ।
वृद्धिवक्र आकार के अनुसार निम्नलिखित दो प्रकार के होते हैं-
(i) 'S' आकार का वृद्धि-वक्र ('S' Shaped Growth Curved)-इस प्रकार की वृद्धि जीवों में प्राकृतिक अवस्था में होती है। शुरू में इसकी गति धीमी होती है। इसका कारण जीवों का क्षेत्र में धीमी गति से समायोजित होना होता है तथा वह अपने क्षेत्र को स्थापित करते हैं। जिससे प्रजनन. जीवों की संख्या कम हो जाती है। जब यह जीव अपने क्षेत्र में स्थापित हो जाते हैं तब इनमें वृद्धि तीव्र गति से होती है इसे स्थापन अवस्था कहते हैं। प्रजनन योग्य जीवों की संख्या भी बढ़ जाती है। तथा भोजन व आवास पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध होता है। यह मध्य प्रावस्था या चरघातांकी प्रावस्था कहलाती है। जब मध्य प्रावस्था में जीवों की वृद्धि तीव्र होती है तो भोजन सामग्री एवं रहने के लिये आवास कम हो जाता है । जीवों में संघर्ष होता है। इन सबके परिणामस्वरूप जीव संख्या वृद्धि के ऐसे स्तर पर पहुँच जाती है जिसमें जन्मदर एवं मृत्युदर एक समान हो जाती है। अत: अन्त में जीवों के अपने वातावरण से साम्य स्थापना को स्थिर या स्तब्ध अवस्था शून्य वृद्धि प्रावस्था (Stationary phase) कहते हैं। इस प्रकार से वृद्धि कर रही जीव संख्या एवं समय के मध्य ग्राफ बनायें तो उसकी आकृति S आकार की बनती है।
(2) J' आकार का वृद्धि वक्र ('J' Shaped Growth Curve)-जब जीवसंख्या तीव्र दर से बढ़ती है एवं एक निश्चित उच्च सीमा पर स्थिर हो जाती है। अर्थात् मृत्युदर एवं जन्मदर बराबर हो जाती है, तब वृद्धि दर शून्य हो जाती है। यह भोजन सामग्री में कमी के कारण होता है। यह वृद्धि वक्र J आकृति का होता है। इसकी तीन प्रावस्थाएँ प्रदर्शित होती हैं-
(i) पश्चता प्रावस्था (Lagphase)- इस अवस्था में वृद्धि अत्यन्त कम होती है।
(ii) चरघातांकी प्रावस्था (Exponetial Phase)-इस प्रावस्था के पश्चात जनसंख्या में ज्यामितीय रूप में तीव्र वृद्धि होती है।
(iii) अन्तिम या विनाश प्रावस्था (Crash Phase)-यह जनसंख्या वृद्धि के ठहराव की अवस्था होती है। यह अवस्था पर्यावरण की धारक क्षमता पार होने पर जीवों को जीवित रहने के लिये आवश्यक संगाधनों की कमी होने पर प्राप्त होती है। इसीलिए यह अन्तिम या विनाश प्रावस्था कहलाती है।
इसमें J की आकृति का वक्र बनता है जो वातावरणीय प्रतिरोध के नगण्य व शून्य स्थिति को दर्शाता है। विश्व में मानव जनसंख्या की स्थिति J आकृति का वक्र दर्शाती है। जैसे-कीटों (Insects) में।

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