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BIOLOGY
प्रकाश संश्लेषण को परिभाषित कीजिए । इस क...

प्रकाश संश्लेषण को परिभाषित कीजिए । इस क्रिया को प्रभावित करने वाले विभिन्न कारकों का उल्लेख कीजिए।

लिखित उत्तर

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जनसंख्या वृद्धि को नियन्त्रित करने वाले निम्नलिखित कारक हैं-
(i) विवाह की आयु में वृद्धि (Increase in age of marriage)-पुराने समय से ही हमारे देश में बाल- विवाह एक कुरीति के रूप में परम्परा का हिस्सा बनी रही है। जिस पर रोक लगाया जाना परम आवश्यक हो गया है। इसके लिये कानूनी व्यवस्था के अन्तर्गत विवाह की आयु बढ़ाकर लड़कियों के लिये 21 वर्ष तथा लड़कों के लिये 24 वर्ष कर देनी चाहिए।
(ii) शिक्षा प्रसार-शिक्षा ही एक ऐसा माध्यम है जिसकी सहायता से अज्ञानता और गरीबी को दूर कर जनसंख्या वृद्धि पर रोक लगायी जा सकती है। लोगों को परिवार नियोजन के लाभों से अवगत कराया जाना चाहिए, इसके लिये यौन शिक्षा की भी पूर्ण व्यवस्था होनी चाहिए।
(ii) प्रकृत्तिक विधिचाँ (Teturaetrods)-হণ विथियों में अण्डाणु (ओवम) एवं शुक्राणु के संगम को रोकने का सिद्धान्त कार्य करता है। इसमें आवधिक संयम को अपनाकर गर्भाधान को रोका जा सकता है। इसके अतिरिक्त बाह्य स्खलन या अंतरित मैथुन (Coutius Interruption) एक अन्य विधि के द्वारा पुरुष साथी संभोग के दौरान वीर्य स्खलन से ठीक पहले स्त्री की योनि से अपना लिंग बाहर निकाल कर वीर्यसेचन से बच सकता है। स्तनपान अना्तव विधि द्वारा भी गर्भधारण को रोकने में सफल है। यह विधि प्रसव के बाद ज्यादा से ज्यादा 6 माह तक की अवधि तक ही कारगर मानी गयी है।
(iv) परिवार नियोजन (कल्याण) (F amily Planning Welfare)-परिवार नियोजन ही एकमात्र कारगर साधन है जो बढ़ती हुई जनसंख्या की समस्या को कुछ हद तक हल कर सकता है। इसके अन्तर्गत गर्भनिरोधक साधनों के उपयोग के विषय में ज्ञान कराया जाता है ताकि विवाहित दम्पत्ति अपनी इच्छा के अनुसार ही सन्तानों को जन्म दे सकें एवं परिवार वृद्धि पर नियन्त्रण कर सकें। भारत सरकार व राज्य सरकारें इस पर बहुत अधिक धन खर्च कर रही हैं, क्योंकि यही एक कारगर तरीका है, जनसंख्या वृद्धि पर रोक लगाने का इसके अन्तर्गत निम्नलिखित साधनों को उपयोग में लाया जा रहा है-
(अ) रोध (Barier)-इसके लिये स्त्री अथवा पुरुष दोनों के लिये कंडोम (निरोध) आदि रोधक उपाय किये गये हैं, जो अण्डाणु और शुक्राणु को भौतिक रूप से मिलने से रोक देते हैं । इसके अतिरिक्त डायाफ्रॉम, गर्भाशय ग्रीवा टोपी तथा वॉल्ट आदि भी रोधक उपाय प्रयोग किये जा रहे हैं। शुक्राणुनाशक क्रीम, जेली एवं फोम (झाग) का प्राय: इस्तेमाल किया जाता है।
(ब) गर्भाशयी युक्ति (Intra Vterine Device, IVD)-ये युक्तियाँ डॉक्टरों या अनुभवी नसों के द्वारा योनि मार्ग से गर्भाशय में लगायी जाती है। जैसे-आई यू डी, ताँबा मोचक आई यू डी तथा हॉर्मोन मोचक आई यू डी आदि।
(स) गर्भनिरोधक गोलियाँ-ये गोलियाँ' पिल्स' के नाम से लोकप्रिय हैं जैसे-सहेली आदि। इन्हें महिलाओं के द्वारा एक गर्भनिरोधक प्रोजेस्टोजन अथवा प्रोजेस्टोजन और एस्ट्रोजन के संयोजन के रूप में मुँह द्वारा लिया जाता है।
(द) शल्यक्रिया विधियाँ-इसके अन्तर्गत बंध्याकरण विधि को अपनाया जाता है। पुरुषों में प्रयोग की जाने वाली विधि को वासैक्टोमी तथा महिलाओं में प्रयोग की जाने वाली विधि टूबैक्टोमी कहलाती हैं यह पुरुष या महिला नसबंदी के नाम से भी जानी जाती है।
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