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BIOLOGY
रेखित एवं अरेखित पेशी ऊतकों के कार्य का ...

रेखित एवं अरेखित पेशी ऊतकों के कार्य का वर्णन कीजिए।

लिखित उत्तर

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द्विनिषेचन आवृत्तबीजी पौधों का एक विशिष्ट व अनुपम लक्षण है। इन पौधों में निषेचन क्रिया दो बार मैं सम्पन्न होती है । प्रथम निषेचन में नरयुग्मक तथा अप्डकोशिका का सलयन होत है। इसे युग्मक संलयन (Syngamy) कहते हैं। इसके पश्चात् दूसरा नरयुग्मक, द्वितीयक केन्द्रक ( दो ध्रुवीय केन्द्रकों के संयोजन से बना) से संयोजित होकर त्रिगुणित प्राथमिक भ्रूणपोष केन्द्रक का निर्माण करता है। इसे त्रिकसंलयन कहते हैं । युग्मक संलयन व त्रिक संलयन की घटना को सम्मिलित रूप से द्विनिषेचन कहते हैं।
भ्रूणपोष का महत्त्व युग्मक संलयन से बने युग्मन ज से भ्रूण निर्माण के लिए त्रिगुणित भ्रूणपोष का निर्माण होना अवश्यक है। इस भ्रूणपोष से ही भ्रूण निर्माण के दौरान पोषण प्राप्त होता है। युग्मनज से भ्रूण का निर्माण, भ्रूणपोष की अनुपस्थिति में सम्भव नहीं है।
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