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BIOLOGY
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निम्नलिखित पर टिप्पणी लिखिए । (i) बहुभ्रूणता (ii) परागण

लिखित उत्तर

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इस विधि में डी. न. ए . के टुकड़ो को अगेरोज जैल पर प्राप्त के बाद (जैल इलेक्ट्रोफोर्सिस द्वारा ) इन्हे नाइट्रोसेल्यूलोज़ (Nitrocellulose) फ़िल्टर पर स्थानांत्रित कर स्थिर कर लिया जाता है फिर इन्हे डी. न.ए . प्रोब्स द्वारा संकरण से पहचाना जाता है
.सर्वप्रथम ई . एम . सदर्न (E.M. Southern 1975) ने डी. न. ए. खंडो को नाइट्रोसेल्योलोज फ़िल्टर पर स्थानांतरित किया इसलिए इस तकनीक को सदर्न ब्लाडिंग तकनीक (Southern blotting technique) कहते है इस तकनीक द्वारा खंडो का विश्लेषण किया जाता है
इस विधि की खोज एलेक जेफ़्फ़्रेस व साथियो ने की थी डीएनए में उपस्थित नाइट्रोजन सरो के विशिष्ट अनुक्रम के कारण एक व्यक्ति विशेष को पृथकता से पहचाना जा सकता है प्र्त्येक व्यक्ति विशेष के डीएनए की छाप या चित्र सदैव एक जैसा होता है चाहे वो शरीर के किसी भी अंग की कोशिका से लिया गया हो.
इस विधि में डीएनए को छोटे छोटे खंडो में रेस्ट्रिक्शन एन्डोन्यूक्लिज एंजाइम की सहायता से तोड़ कर जैल इलेक्ट्रोफोरेसिस की सहायता से बैंड्स के रूप में अलग कर लेते है फिर सदर्न ब्लाटिंग तकनीक द्वारा प्लेट पर या UV प्रकश की सहायता से उद्भाषित कर लिया जाता है इसे डीएनए फिंगर प्रिंटिंग कहते है -
डीएनए फिंगर प्रिंटिंग का उपयोग
(i) किसी भी बच्चे के माता पिता के बारे में पता लगाना
(ii) आनुवंशिक रोग जैसे हीमोफिलिया आदि का शिशु जन्म से पूर्व पता लगाना -
(iii) बलात्कार व हत्या जैसे अपराध के अभियुक्तिको की पहचान में
3 मुलिस (1989) ने डीएनए प्रतिलिपिकरण के लिए एक सशक्त तकनीक खोजी जिसके द्वारा डीएनए की एक प्रतिलिपि से लाखो प्रतिलिपियाँ अत्यंत काम समय से प्राप्त की जा सकती है इसे पॉलिमरेज़ शृखंला अभिक्रिया के नाम से जाना जाता है
. इस अभिक्रिया के तीन प्रमुख चरण है जो बारम्बार चर्कित हो डीएनए बहुलीकरण करते है तथा लगभग 20- बार दोहराने पर डीएनए की लाखो प्रतियां निर्मित हो जाती है यह अभिक्रिया डीएनए थर्मल साइक्लर में सपन की जाती है प्र्त्येक चक्र 225 को पूर्ण होने में सेकंड का समय लगता है < br> (i) एंजाइम का प्रथम अक्षर वंश का होता है जिससे उसको पृथक किया जाता है या हमेशा बड़े अक्षरों में लिखा जाता है
(ii) एंजाइम का प्रथम अक्षर वंश का होता है जिससे उसको पृथक किया जाता है या हमेशा बड़े अक्षरों में लिखा जाता है उदाहरण Eco. = E.coli (एशेरिकीया कोली में )
hin = H. influenzae (हीमोफिलस इंफ़्ल्युएन्जी से )
(iii)चौथे अक्षर के रूप इ वंश के उस प्रभेद को लिखा जाता है जिससे उसे निकला गया है
(iv) यदि एक ही जीव से एक से अधिक रेस्ट्रिक्शन एंजाइम प्राप्त होते है तो उन्हें रोमन अंको द्वारा प्रदर्शित किया जाता है उदाहरण - Eco RI Eco RII 5
(i) यह परपोषी कोशिका में पुनरावर्ती के लिए स्वतंत्र होना चाहिए - (iii) वाहक अणु में विशिष्ट प्रतिबंध स्थल होने चाहिए जिनको रेस्ट्रिक्शन एन्डोन्युक्लिएज एंजाइम आसानी से तोड़ प्रतिबंध स्थल पर विजतीय डीएनए का निवेश आसानी से हो सकता है
इनमे एक चिन्हित स्थल होना चाहिए जो रूपांतरित कोशिकाओं के चयन में सहायक हो
(v) इसके द्वारा रूपांतरण सरल व दक्ष हो |
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