प्रसिद्ध आर्थिक वनस्पति विज्ञानी एएफ हिल (1952 ) ने अपनी पुस्तक (Economic Botany ) में उपयोगिता के आधार पर पादप रेशो को 6वर्गों में विभक्त किया है -
1.वस्त्र रेशे (Textile fibres )- इन रेशो से कपडे ,रस्सिया ,बोरे,सुतली आदि बनाये जाते है , जैसे कपास ,जूट, सन आदि।
2.कुर्च या ब्रुश रेशे (Brush fibres )-इनका उपयोग झाड़ू ,ब्रुश बनाने में किया जाता है , जैसे खजूर की पत्तियां।
3.गूंथने तथा खुरदुरे बुनने वाले रेशे (Plaiting and rough weaving fibre s )- इनसे टोकरिया ,चटाइयां ,टोपिया ,कुर्सियों की सीट आदि बनाये जाते है , उदहारण बांस।
4.भराव रेशे (Filling fibres )-इन रेशो का उपयोग रजाइयां ,गद्दे ,तकिय आदि क्र भरने में किया जाता है ,जैसे कपास ,मदार ,सेमल ,कोयर (नारियल )आदि।
5.प्राकृतिक रेशे (Natural fibres )-इन रेशो का उपयोग सीधे ही सरीर ढकने में किया जाता है जैसे -पत्र शहतूत (Broussonetia papyrifera ) जिसकी छाल से तापा वस्त्र (Tapa cloth ) बनाया जाता है।
6.कागज़ बनाने वाले रेशे (paper making fibres )-इनसे कागज़ ,कार्ड बोर्ड आदि बनाये जाते है जैसे बांस ,मिलगिरि ,(Eucalyptus ) कई प्रकार की घाँसे ,सफ़ेद ( Populas alba ) आदि। वस्त्र निम्न प्रकार के होते है -कपास ,स।