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BIOLOGY
परानिस्पंदन तथा चयनात्मक पुनः अवशोषण की ...

परानिस्पंदन तथा चयनात्मक पुनः अवशोषण की मूत्र निर्माण में क्या भूमिका है?

लिखित उत्तर

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परानिस्यंदन या सूक्ष्मछनन की क्रिया की सहायता से ग्लोमेरुलस से रक्त हानिकारक पदार्थ छनकर बोमन सम्पुट की गुहा में आते हैं। इनको ग्लोमेरुलर निस्यंद कहते हैं।
परानिस्पंदन क्रिया से उत्पन्न ग्लोमेरूलर निस्वंद में यूरिया, यूरिक अम्ल, क्रियेटिनिन आदि उत्सर्जी पदार्थ के साथ ग्लूकोज, ऐमीनो अम्ल, कुछ वसीय अम्ल, विटामिन, जल तथा अन्य उपयोगी लवण भी होते हैं। निस्यंद में रुधिर के जल का लगभग 95% भाग छनकर आ जाता है, किन्तु इसका लगभग 0.8% भाग ही मूत्र में परिवर्तित होकर बाहर निकलता है। इसमें पाये जाने वाले लाभदायक पदार्थों जैसे ग्लूकोज, विद्यमिन, अमीनो अम्ल आदि का वृक्क नलिकाओं द्वारा रुधिर में पुनरावशोषण कर लिया जाता है। वृक्क नलिकाओं से लाभदायक पदार्थों का पुन: रुधिर में पहुँचना वरणात्मक पुनः अवशोषण कहलाता है।
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