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BIOLOGY
हृदय का आकार कैसा होता है?...

हृदय का आकार कैसा होता है?

लिखित उत्तर

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1. मिनरलो कॉर्टिकॉयड्स (Mineralocorticoids)- ये हॉर्मोन रूधिर तथा वृक्क में खनिज आयनों की सान्द्रता का नियमन करते हैं। इनमें सबसे मुख्य ऐल्डोस्टेरोन (Aldosterone) है। इस हॉर्मोन के द्वारा वृक्क नलिकाओं में `Na^(+)` तथा CI आयनों के अवशोषण तथा `K^(+)` आयनों के उत्सर्जन में वृद्धि की जाती है। यह रुधिर में खनिज आयनों की मात्रा को नियंत्रित रखता है।
2. ग्लूकोकॉर्टिकॉयड्स (Glucocorticoids)- इसके प्रमुख हॉर्मोन कॉर्टिसॉल (Cortisol) एवं कॉर्टिसोन (Cortisone) होते हैं । इन हॉर्मोन्स के द्वारा कार्बोहाइड्रेट, वसा तथा प्रोटीन के उपापचय को नियंत्रित किया जताा है। ये रुधिर में ग्लूकोस, वसीय अम्लों तथा ऐमीनों अम्लों की मात्रा बढ़ाते हैं। ये यकृत में ग्लाइकोजिनेसिस, ग्लूकोनिओजिनेसिस तथा यूरीओजिनेसिस को प्रेरित करते हैं। ये किसी ऊतक में संक्रमण होने पर प्रतिरक्षी पदार्थ (Antibodies) के बनने की क्रिया को रोकते हैं। अतः ये प्रतिरक्ष निषेधात्मक (Immune suppressive) होते हैं। इसके अतिरिक्त ये जल व लवण संतुलन तथा अंगों के प्रत्यारोपण को सफल बनाने हेतु उपयोगी है। ये प्रदाहरोधी (Anti-inflammatory) प्रकृति के होते हैं। इनका उपयोग गठिया, दमा इत्यादि के उपचार में किया जाता है।
3. लिंग हॉर्मोन्स (Sex Hormones)- अधिवृक्क वल्कुट से तीन प्रकार के लिंग हॉर्मोन्स ऐन्ड्रोजन, ऐस्ट्रोजन तथा प्रोजेस्टरॉन की थोड़ी-थोड़ी मात्रा का स्राव किया जाता है। ये हॉर्मोन्स बाह्य जनन अंगों एवं यौन व्यवहार को प्रभावित करते हैं। स्त्रियों में इस हॉर्मोन की अधिकता से चेहरे पर बाल बढ़ने लगते हैं। इस रोग को दीर्घलोपता (Hirsutism) कहते हैं। ये हॉर्मोन नर व मादा में पेशियों तथा जननांगों का विकास करते हैं।
अधिवृक्क मेडयुला द्वारा स्रावित हॉर्मोन
(Hormones Secreted by Adrenal medulla)
1. ऐड्रीनेलिन (Adrenalin)- यह हॉर्मोन अनुकम्पी तंत्रिका तंत्र से होने वाली क्रियाओं को संचालित करने में मदद करता है। यह हॉर्मोन अरेखित पेशियों को उत्तेजित करता है, जिससे रुधिर वाहिनियों की दीवार सिकुड़ने से रुधिर का दाब बढ़ना, हृदय की धड़कन बढ़ना, आँखे चौड़ी तथा पुतली फैल जाना, शरीर पर रोंगटे खड़े हो जाना, पसीना बहुत अधिक आना तथा यकृत में संचित ग्लाइकोजन का ग्लूकोज में परिवर्तन होकर रुधिर में आने लगना आदि क्रियायें होने लगती है।
• एड्रीनिलिन हॉर्मोन संकटकालीन परिस्थितियों का सामना करने के लिए मानव शरीर को तैयार करता है। मानसिक तनाव, गुस्से व डर के समय उत्पन्न होने वाले शारीरिक लक्षणों के समय इसका स्राव अधिक होता है जिससे अधिक ऊर्जा मिलने के कारण संकट की परिस्थिति का सामना किया जा सके।
2. नॉर ऐड्रीनेलिन (Nor Adrenalin)- यह हॉर्मोन ऐड्रीनेलिन के द्वारा नियमित होने वाली समान क्रियाओं को प्रेरित करता है। इसके द्वारा रुधिर वाहिनियाँ फैल जाती है। इसके द्वारा हृदय की गति व रुधिर का दाब नहीं बढ़ता है।
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