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BIOLOGY
परिभाषित करें (i) युग्मविकल्पी (ऐलील)...

परिभाषित करें (i) युग्मविकल्पी (ऐलील)

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ऐलील किसी भी कारक अथवा जीन के दो या दो से अधिक विक्लपी रूप। उदहारण के लिए मटर के पौधे में बीज को आकृति प्रदान करने वाले जीन के दो विक्लपी रूप हो सकते हैं-गोल (R) व झुर्रीदार (r)। गोल व झुर्रीदार बीजों के लिए दोनों जीन एक दूसरे के ऐलील है। इसी प्रकार मनुष्यों में रक्त समूह को नियंत्रित करने वाले जीन के तीन एलिल `I_(A),I_(B)` तथा `I_(o)` (I = इम्यूनोहीमोग्लोबीन जीन) । समजती गुणसूत्र में ऐलील सामान स्थान पैर रहते हैं।
(ii) सह - प्रभाविता में एक युगमविकल्पी जोड़ों में विद्यमान दोनों प्रभावी एवं अप्रभावी कारक`F_(1)` पीढ़ी में लक्षण को प्रकट करने में समान रूप से योगदान करते हैं। इस प्रक्रिया को सह- प्रभाविता कहते हैं। मवेशियों में त्वचा का रंग ( Skin colour in cattles ) लाल (RP) व सफेद (rr) होता है । इनमें परस्पर संकरण करवाने पर `F_(1)` पीढ़ी में उत्पन्न मवेशियों की त्वचा का रंग चितकबरा (Roan) Rr होता है । चितकबरा रंग लाल व सफेद दोनों कारकों के लक्षण प्रकट होने से प्राप्त होता है । यदि `F_(1)` पीढ़ी में प्राप्त मवेशियों में आपस में संकरण करवाया जाता है तो `F_(2)` पीढ़ी में लाल , चितकबरे व सफेद मवेशियों का अनुपात `1 : 2 : 1` (RR : Rr :rr) प्राप्त होता है । अत: सह - प्रभाविता में भी मेंडेलियन अनुपात का अनुसरण नहीं होता है
(iv) कुछ जीन बाहरी लक्षणों के नियंत्रण के साथ - साथ जीवों की जीवन क्षमता ( Viability) को भी प्रभावित करते हैं। एक फ्रांसीसी वैज्ञानिक एल . कुएनोत (L . Cuenot) ने 1905 में चूहे के शारीरिक रंग की वंशागति के परिणाम प्रस्तुत किये जो मेण्डल के विसंयोजन के नियम के अनुरूप नहीं थे। उन्होंने यह देखा कि चूहों में पीला लोमचर्म जीन(Y ) कि उपस्थिति के कारन होता हैं। यह भूरे रंग (y ) पर प्रभावी होता है । जब पीले रंग के चूहों का संकरण परस्पर करवाया जाता है तो पीले व भूरे रंग के चूहे 2 : 1 के अनुपात में प्राप्त होते हैं। इस संकरण से प्राप्त भूरे चूहे संयुग्मजी थे परन्तु पीले चूहे पूर्व की भाँति विषमयुग्मजी थे। अर्थात संयुग्मजी अवस्था YY में पीले चूहे जीवित नहीं रह पाते हैं तथा Y जीन पीले रंग के लक्षण के साथ -साथ चूहों में जीवन क्षमता को प्रभावित करता है तथा यह मृत्य के लिए उत्तरदायी होता है। अत : संयुग्मजी अवस्था में जीन देह का पीला रंग प्रकट करने के साथ - साथ चूहे की मृत्यु भी हो जाती है इसलिए पीला संयुग्मजी चूहा कभी दिखाई ही नहीं देता है। इस प्रकार के जीन (YY ) घातक जीन (Lethal genes) कहलाते हैं और यह घटना घातकता (Lehtality )कहलाती है। कुछ घातक जीन केवल संयुग्मजी स्थिति में ही घातक होते हैं और अप्रभावी घातक जीन कहलाते हैं । प्रभावी घातक विषमयुग्मजी स्थिति में भी मृत्युकारक हो सकते हैं।
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