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Class 12
BIOLOGY
निम्न के कार्य बताइए- 1. मेढक की मूत्र...

निम्न के कार्य बताइए-
1. मेढक की मूत्रवाहिनी, 2. मैल्पीघी नलिका, 3. केंचुए की देहभित्ति

लिखित उत्तर

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1. मेढक की मूत्रवाहिनी के काय (Function of Ureters of frog) - नर मेढक में वृक्क से दो मूत्रवाहिनी (Ureter) निकलती है | मूत्रवाहिनी अवस्कर द्वार (Cloaca) में खुलती है | मूत्रवाहिनी, मूत्र जनन नलिका (Urinogenital duct) के रूप में कार्य करती है |
मेढक यूरिया का उत्सृजन करता है | उत्सृजी अपशिष्ट रक्त द्वारा वृक्क (Kidney) में पहुँचते हैं, जहाँ पर ये अलग कर दिए जाते हैं और उनका उत्सृजन कर दिया जाता है | मूत्रवाहिनी नाइट्रोजनी अपशिष्ट को शरीर से बाहर निकालने में मदद करती है |
2. मैल्पीघी नलिका के काय (Function of Malpighi tubule) - मैल्पीघी नलिकाएँ हिमोलिम्फ से उत्सृजी पदार्थो के उत्सृजन में सहायक होती हैं |
3. केंचुए की देहभित्ति के कार्य (Function of Earthworm's body cell) - केंचुए की शारीरिक भित्ति निम्न संरचनाओं की बनी होती है-
(i) क्यूटिकल - यह एक पतली, एककोशिकीय नर्म तथा काइटिनस क्यूटिकल से ढँकी होती है |
(ii) अधिचर्म - यह एक स्तरीय क्यूटिकल के नीचे कई प्रकार की कोशिकाओं की बनी होती है-
(i) सहायक कोशिका, (ii) ग्रंथिल कोशिका- (a) म्यूकस कोशिका, (b) एल्ब्युमिन कोशिका, (c) अपिका कोशिका, (iii) आधारीय कोशिका, (iv) ग्राही कोशिका, (v) सेटिजेरस |
(iii) पेशीय स्तर - अधिचर्म के नीचे बाह्य वलयाकार एवं आंतरिक लंबवत पेशियों से बनी होती है | ये समानांतर समूहों के रूप में होती हैं | वलयाकार पेशियाँ पेरिटोनियम के बाह्य भाग में पायी जाती हैं | ये दो प्रकार की होती हैं - 1. प्रोट्रेक्टर एवं 2. रिट्रेक्टर पेशियाँ |
(iv) पैराइटल पेरिटोनियम - इसे पैराइटल परत भी कहा जाता है | यह शारीरिक भित्ति की सबसे आंतरिक भित्ति होती है | यह सीलोम की बाह्य सीमा बनाती है, यह गुहिय द्रव स्त्रावित करने में मदद करती है |
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