पौधों में कम-से-कम पाँच अपर्याप्तता के लक्षण दीजिए। उसे वर्णित कीजिए और खनिजों की कमी से ठसका सह-संबंध बताइए।
लिखित उत्तर
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पौधों में खनिजों की कमी अथवा अपर्याप्तता के लक्षण निम्नलिखित हैं 1. पौधों पर नाइट्रोजन की कमी के प्रभाव-पौधों की पत्तियाँ पीली पड़ जाती हैं तथा कोशिका विभाजन की कमी के कारण पौधे की वृद्धि रूक जाती है। 2. फॉस्फोरस की कमी के प्रभाव-फॉस्फोरस की न्यूनता के कारण पौधों की वृद्धि रूक जाती है और वे स्तम्भित (Stunted) रह जाते हैं । ऐन्थ्रोसाइनिन की मात्रा अपेक्षाकृत अधिक हो जाती है और बैंगनी रंग दिखाई देने लगता है। पत्तियाँ कालपूर्व (Premature) गिरने लगती हैं। पत्तियों, र्णवृन्तों तथा फलों पर ऊतकक्षयी (Necrotic) क्षेत्र बन जाते हैं । संवहन ऊतक का विकास कम होता है तथा फूल भी देर से आते हैं। 3. सल्फर की कमी का प्रभाव-इसकी कमी में भी हरिमहीनता उत्पन्न होती है, किन्तु यह पहले की पत्तियों में विकसित होती है, लेकिन कभी-कभी पूरी पत्तियाँ एक साथ हरिमहीनता प्रदर्शित करती हैं। 4. मैग्नीशियम की कमी के प्रभाव-इसकी कमी से अन्तराशिरीय हरिमहीनता उत्पन्न होने के बाद साइनिन का विकास होता है । अत्यधिक कमी के कारण ऊतकक्षरण पैदा हो जाता है । प्रौढ़ पत्ती में कमी के लक्षण पहले दिखते हैं। 5. ताँबे की कमी के प्रभाव-ताँबे की कमी के कारण पौधों में कई शरीर क्रियात्मक रोग पैदा होते है फलदार पौधों में फल नहीं लगता और मृत्यु तक हो जाती है। पौधों में co, का अवशोषण घट जाता है । इसकी कमी से नीबू में डाइबैक रोग, अनाजों में उद्धार (Reclamation) रोग लगता है। 6. जिंक की कमी के प्रभाव-इसकी कमी से तने की वृद्धि लघकत हो जाती है, जिससे पौधा स्तम्भित (Stunted) रह जाता है। पत्तियाँ विकृत होने लगती हैं तथा अन्तराशिरीय हरिमहीनता को प्रदर्शित करती हैं। पर्वो की माप कम हो जाती है, जिसे लिटिल लीफ रोग कहते हैं। इसकी कमी से बीजों का निर्माण कम हो जाता है।