प्रकाशीय प्रतिक्रिया (Light Reaction) या प्रकाश-रासायनिक क्रिया (Photochemical Donction) या हिल प्रतिक्रिया (Hill Reaction)-इस क्रिया में प्रकाश की आवश्यकता पड़ती है तथा इसकी खोज हिल (1937) ने की। इस कारण इस क्रिया को ये नाम दिया है।
इस क्रिया में वर्णकों द्वारा प्रकाश की ऊर्जा को अवशोषित करके ATP और `"NADPH"_2` के रूप में संचित मालया जाता है। यह क्रिया क्लोरोप्लास्ट (हरितलवक) के प्रैनम में होती है इसे निम्नांकित समीकरण स व्यक्त कर सकते हैं--- `12H_2AO" + 12NADP + 18 ADP"underset("पर्णहरिम")overset("प्रकाश")(to)6O_2+"12NaDPH"_(2)+"18ATP"`
रॉबर्ट इमर्सन के अनुसार प्रकाशीय प्रतिक्रिया में प्रकाश का अवशोषण दो प्रकार के वर्णक समूहों के द्वारा किया जाता है, जो निम्नलिखित हैं
1. वर्णक तन्त्र -I (Pigment System - I)-यह वर्णक तन्त्र सूर्य के प्रकाश की उन किरणों को अवशोषित करता है, जिनकी तरंगदैर्घ्य `680 mu m` से कम या अधिक होती है।
इस क्रिया में सूर्य के प्रकाश के दो फोटॉन (प्रकाश इकाई) को अवशोषित करके वर्णक अणु के दो इलेक्ट्रॉन उत्तेजित हो जाते हैं और वर्णक अणु से निकल जाते हैं। अब वर्णक का अणु ऑक्सीकृत (Oxidised) हो जाता है। निकला हुआ यह इलेक्ट्रॉन सबसे पहले फेराडॉक्सिन द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है । फेराडॉ क्सिन से होकर यह इलेक्ट्रॉन क्रमशः साइटोक्रोम ‘`b_6`' साइटोक्रोम-f' तथा प्लास्टोसाइनिन से होते हुए P-700 वर्णक (वर्णक जो `700 mu m` तक के प्रकाश को अवशोषित कर लेते हैं अर्थात् वर्णक तन्त्र I) को लौट आते हैं। ये सभी पदार्थ इलेक्ट्रॉन को ग्रहण करते समय ऑक्सीकृत होते हैं तथा इलेक्ट्रॉन ग्राही का काम करते हैं, लेकिन इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके अपचयित हो जाते हैं और इलेक्ट्रॉन दाता का व्यवहार करने लगते हैं। इस इलेक्ट्रॉन स्थानान्तरण के समय इलेक्ट्रॉन द्वारा अवशोषित प्रकाश ऊर्जा के रूप में निकलती है और इस ऊर्जा से कोशिका के क्लोरोप्लास्ट के ग्रैनम में उपस्थित ADP, अकार्बनिक फॉस्फेट से मिलकर ATP बना देता है। ATP का निर्माण दो जगहों पर होता है-(i) जब इलेक्ट्रॉन फेरोडॉक्सिन से साइटोक्रोम-`b_6`' को जाता है।
(ii) जब इलेक्ट्रॉन साइटोक्रोम -"`b_6`' से साइटोक्रोम -"f को जाता है।
चूँकि इस क्रिया में फॉस्फेट यौगिक जुड़कर ATP बनाता है और इलेक्ट्रॉन वर्णक से निकलकर चक्कर लगाते हुए पुनः वर्णक में लौट आता है। साथ ही यह क्रिया प्रकाश उत्तेजना के कारण होती है इसलिए इस क्रिया को चक्रीय फोटोफॉस्फोरिलेशन (Cyclic photophosphorylation) कहते हैं।
2. वर्णक तन्त्र - II (Pigment system - ID-यह वर्णक तन्त्र केवल `680 mu m` से छोटी तरंगों को ही अवशोषित करता है।
इस क्रिया में दो फोटॉन प्रकाश को अवशोषित करके वर्णक क्लोरोफिल-a673 उत्तेजित हो जाता है और अपने दो इलेक्ट्रॉनों को उत्सर्जित कर देता है। यह इलेक्ट्रॉन प्लास्टोक्विनोन द्वारा ग्रहण कर लिया जाता है । इसके बाद यह इलेक्ट्रॉन वर्णक तन्त्र-I साइटोक्रोम-`b_6`, साइटोक्रोम-f तथा प्लास्टोसाइनिन से होते हुए P-700 अणु में चला जाता है। यहाँ से यह इलेक्ट्रॉन फेराडॉक्सिन से होकर NADP (Nicotinamide adenine dinucle otide phosphate) में जाकर मिल जाता है।
वर्णक तन्त्र-II द्वारा प्रकाश का अवशोषण होने पर इस ऊर्जा से जल के 24 अणुओं का विघटन होता है---`24H_2Oto 24OH^(-)+24H^(+)`
इसमें बने (`OH^(-)`) आयन से इलेक्ट्रॉन निकलकर वर्णक तन्त्र-II के वर्णक में चला जाता है और ऑक्सीकृत हरितलवक को पुनः अपचयित कर देता है फलतः वह अपनी मूल अवस्था में लौट आता है। बचे हुए OH मूलक जल और ऑक्सीजन बना देते हैं।
`24(OH)^(-)24e^(-)to 24OH`
`24 OH to 12H_2 O + 6O_2`
जल-अपघटन में बने `24H^(+)`, NADP से तथा फेराडॉक्सिन से इलेक्ट्रॉन प्राप्त करके `"NADPH"_(2)`, बना देते हैं
इस इलेक्ट्रॉन स्थानान्तरण में जब इलेक्ट्रॉन साइटोक्रोम-`b_6` से साइटोक्रोम-f में जाता है तो उस समय निकली ऊर्जा से एक ATP बनता है। इस प्रकार हम देखते हैं कि इस इलेक्ट्रॉन स्थानान्तरण में `"12NADPH"^2` तथा `6O^2` का निर्माण होता है।
चूंकि इस क्रिया में भी फॉस्फेट यौगिक ATP बनता है, लेकिन निकला इलेक्ट्रॉन लौटकर वापस नहीं आता। इस कारण इसे अचक्रीय फोटोफॉस्फोरिलेशन (Non-cyclic photo-phosphorylation) कहते हैं।
इस प्रकार हम देखते हैं कि 6 चक्रीय फॉस्फोरिलेशन में 12 ATP बनते हैं और 6 बार अचक्रीय फॉस्फोरिलेशन होने पर 6ATP और `"12 NADPH"_(2)`, बनते हैं। एक अचक्रीय फॉस्फोरिलेशन में `"2NADPH2"_2` बनते हैं और `"24H_(2)O` का विघटन होता है। अतः प्रकाश प्रतिक्रिया के अन्त में (दोनों तन्त्रों) 18ATP और `"12NADPH"_(2)`, अणुओं का निर्माण होता है।
उपयुक्त दोनों वर्णक तन्त्रों के अध्ययन से यह भी पता चलता है कि दोनों प्रक्रम साथ-साथ श्रणा । हैं और एक-दूसरे पर निर्भर करते हैं । प्रकाश-संश्लेषण के पूर्ण होने के लिए दोनों ही वर्णक तन्त्र आवशयक है |