आमाशय में होने वाला पाचन-आमाशय में भोजन पहुँचकर गाढ़ी लुग्दी के समान बन जाता है। इसमें जठर रस अच्छी तरह मिल जाता है। इस रूप में इसे काइम कहते हैं । जठर रस अम्लीय होता है। (1) HCl, पेप्सिन, रेनिन और ग्रैस्ट्रिक लाइपेज एन्जाइम होते हैं। ' (1) HCl काइम को अम्लीय बनाता है और टायलिन को निष्क्रिय करता है। जीवाणुओं को नष्ट कर पेप्सिनोजन को निष्क्रिय कर पेप्सिन में बदलता है। पेप्सिनोज `overset(H^(+))(to)` पेप्सिन (2) पेप्सिन प्रोटीन अणुओं को प्रोटिओजेज़ तथा पेप्टोन्स में अपघटित करता है। रेनिन HCI एवं `Ca^("++")` आयन्स की उपस्थिति में केसीनोजन को अविलेय केसीन में बदलता है। प्रोटीन + पेप्सिन `overset(H_(2)O)(to)` प्रोटीओज `overset(H_(2)O)(to)` पेप्टोन प्रोरेनिन `overset("HCI")(to)` प्रोटिओज `overset(H_(2)O)(to)` पेप्टोन रेनिन + केसिन `to` पेराक्सिन पेराक्सिन + `Ca^("++") to ` केल्सियम - पेराक्सिनेट केल्सियम - पेराक्सिनेट + पेक्सीन `to` प्रोटिओज + पेप्टोन + पॉलीपेप्टाइड जठर लाइपेज कमजोर वसाओं को वसीय अम्ल और गिल्सरायल में बदलता है | इसके बाद भोजन पाइलोरिक छिद्र से ग्रहणी में प्रवेश करता है |
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