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BIOLOGY
वर्गीकरण की पद्धतियों में समय के साथ आए...

वर्गीकरण की पद्धतियों में समय के साथ आए परिवर्तनों की व्याख्या कीजिए |

लिखित उत्तर

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1. लीनियस - कैरोलस लीनियस एक प्रमुख स्वीडिश जीव विज्ञानी थे, जिन्हें जीव विज्ञान विषय में उनके योगदान के कारण वर्गीकरण का जनक कहा जाता है | ये द्वि-जगत वर्गीकरण पद्धति के जनकों में से एक हैं | आज भी हम इन्हीं के वर्गीकरण को आधार मानकर जोवों का आधुनिक वर्गीकरण करते हैं | इन्होने सम्पूर्ण जोवों को दो जगत जंतु एवं पादप में बाँटा है | जीवो के नामकरण की द्वि-नाम नामकरण पद्धति के भी जनक लीनियस ही थे, जिसके कारण जीवों को पुरे विश्व में एक नाम मिला एवं जीव विज्ञान का अध्ययन आसान बना | इन्होने अपनी पुस्तक 'सिस्टेमा नेचुरी' में 4738 जंतुओं को वैज्ञानिक नाम दिया | 2. कृत्रिम वर्गीकरण - कृत्रिम वर्गीकरण, वर्गीकरण की प्राचीनतम एवं अप्राकृतिक पद्धति है, जिसमें जीवों को, उनके एक या कुछ लक्षणों जैसे - आवास, बाह्य आकार, व्यवहार तथा आकृति की समन्ता आदि को आधार मानकर वर्गीकृत किया जाता है | वर्गीकरण की यह पद्धति 300 B.C. से सन 1830 तक प्रचलित रही | अरस्तु, थियोफ्रास्टस तथा जॉन रे इस वर्गीकरण पद्धति के प्रमुख वैज्ञानिक थे | प्लैनि इस पद्धति के प्रमुख समर्थक थे, जिन्होंने जन्तुओं को पहली शताब्दी में आवास के आधार वर्गीकृत किया | लीनियस द्वारा पोशों के वर्गीकरण के लिए भी इस पद्धति का प्रयोग किया गया |
3. प्राकृतिक वर्गीकरण - प्राकृतिक वर्गीकरण वह वर्गीकरण पद्धति है जिसमे जीवों रचनात्मक आकृति, स्वभाव, व्यवहार आदि के गुणों के एक विस्तृत समूह तथा उनके बीच के प्राकृतिक संबंधों को आधार माकर जीवों का वर्गीकरण किया जाता है | इसकी शुरुआत कैरोलस लीनियस ने की थी, लेकिन इसका प्रचलन बाद शुरू हुआ | आधुकिन वर्गीकरण इसी पद्धति पर आधारित है | बेन्थम एवं हुकर (1862 एवं 1883) का पादप वर्गीकरण तथा हेनरी एवं यूसिन्जर का जंतु वर्गीकरण इसी पद्धति पर आधारित है |
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