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BIOLOGY
जातीय क्षेत्र संबंध में समा श्रयण रिग्रे...

जातीय क्षेत्र संबंध में समा श्रयण रिग्रेशन की ढलान का क्या महत्व है ?

लिखित उत्तर

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जर्मनी के महान प्रकृतिविद व भूगोल शास्त्री अलेक्जेंडर वॉन हम्बोल्ट ने दक्षिणी अमेरिका के जंगलों के गहन अन्वेषण के समय दर्शाया कि कुछ सीमा तक किसी क्षेत्र की जातीय समृद्धि अन्वेषण क्षेत्र की सीमा बढ़ाने के साथ बढ़ाती है। वास्तव में जाति समृद्धि और वर्गीको (अनावृतबीजी पादप, पक्षी,चमगादड़, मछलियां) की व्यापक किस्मों के क्षेत्र के बीच संबंध आयताकार अतिपरवलय रेक्टेंगुलर हाइपरबोल होता है चित्र लघुगनक पेमाने आने पर यह संबंध एक सीधी रेखा दर्शाता है जो कि निम्न समीकरण द्वारा प्रदर्शित - logo S = logo C + Z log A जहाँ पर S =जातीय संवृद्धि, A = क्षेत्र, Z =रेखीय ढाल (समा सरायण श्रेयांन गुणांक रिग्रेशन कॉएफिशिएंट), S = Y अन्तः खंड (स्टेरसेप्ट) पारिस्थितिक वैज्ञानिकों ने बताया कि Z का मान 0.1 से 0.2 परास में होता है भले ही वर्गिकी समूह अथवा क्षेत्र (जैसे कि ब्रिटेन के पादप, कैलिफ़ोर्निया की पक्षी या न्यूयॉर्क के मोलस्क) कुछ भी हो। समाश्रयण रेखा (रिग्रेसन नाइन) की ढलान आश्चर्यजनक रूप से एक जैसी होती है। लेकिन यदि हम किसी बड़े समूह जैसे संपूर्ण महाद्वीप के जातीय क्षेत्र संबंध का विश्लेषण करते हैं तब ज्ञात होता है कि समाश्रयण रेखा की ढलान तीर्व रुप से तिरछी खड़ी है (Z का मान की परास 0.6 से 1.2 है ) ।
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