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BIOLOGY
संकटग्रस्त प्रजातियाँ क्या है ? इनके विभ...

संकटग्रस्त प्रजातियाँ क्या है ? इनके विभिन्न प्रकारो का वर्णन कीजिये।

लिखित उत्तर

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पौधों की लगभग 20000 से 25000 प्रजातियाँ विनाश के कगार पर है (एक अनुमान)। इनका संरक्षक आवश्यक है। ऐसे जातियों के पौधे और जीव जंतु को ही संकतापन या विलुप्तप्राय प्रजातियाँ कहते हैं। इनका वर्णन रेड डाटा बुक में किया गया है। द इंडियन प्लांट्स रेड डाटा बुक में संकतापन जातियों को निम्नलिखित समूह में वर्गीकृत किया गया है- (1) विलुप्त(Extinct)- ऐसे पौधे जो कि पूर्व में किसी स्थान विशेष में पाए जाते थे, लेकिन वर्तमान में वे अपने प्राकृतिक स्थानों से विलुप्त हो गए हैं, उन्हें ही विलुप्त प्रजातियाँ कहते हैं। ऐसे पौधे जब उनके प्राकृतिक आवास स्थानों पर उपलब्ध नहीं होते तब उन्हें विलुप्त प्रजाति माना जाता है, अतः इनका संरक्षण असंभव होता है। (2) लुप्तप्राय(Endangered)- ऐसे पादप प्रजातियाँ जो की विलुप्त होने की स्थिति में हो एव वही पारिस्थितिक परीस्तिथियाँ बनी रहे तब उन्हें लुप्त होने से नहीं बचाया जा सकता है, अथार्त जिन प्रजातियों के विलुप्त होने का खतरा बना रहता है उन्हें लुप्तप्राय प्रजाति कहते हैं। ऐसी प्रजातियों की संख्या धीरे-धीरे इतनी कम हो जाती है कि उनमें प्रजनन की संभावनाएं लगभग समाप्त हो जाती है जिसके कारण धीरे-धीरे ये विलुप्त होने लगती है। (3) वल्नरेबल या चपेट में(Vulnerable)- ऐसी पादप प्रजातियाँ जो कि कुछ ही समय में लुप्तप्राय स्थिति में पहुंचने वाली हो उन्हें भी ही वल्नरेबल प्रजातियाँ कहते हैं। यदि इन्हें लगातार उन्हीं पारिस्थितिक स्थितियों का सामना करना पड़ता है तब ये प्रजातियाँ विलुप्त होने लगती है। (4) दुर्लभ(Rare)- ऐसी पादप प्रजातियाँ जो कि संसार में कहीं-कहीं पर और बहुत कम संख्या में उपलब्ध हो उन्हें भी दुर्लभ प्रजातियाँ कहते हैं। ऐसी प्रजातियाँ प्रारम्भ से ही लुप्तप्राय या वल्नरेबल नहीं होती लेकिन धीरे-धीरे लुप्तप्राय स्थिति में आ जाती हैं और अंत में समाप्त हो जाती हैं । (5) अपर्याप्त जानकारी(इन्सुफिसिएंट Knowledge)- ऐसी पादप प्रजातियाँ जिनके संबंध में यह नहीं कहा जा सकता है कि वह किस समूह (1 से 2) के अंतर्गत आती है ऐसी प्रजातियों के बारे में हमें सही जानकारी नहीं मिल पाती लेकिन धीरे-धीरे ये लुप्तप्राय स्थिति में आ जाती है। (6) खतरे से बाहर(आउट ऑफ़ Danger)- ऐसी समस्त पादप प्रजातियाँ जो कि उपर्युक्त श्रेणियों (1 से 5) के अंतर्गत पहुँच चुकी होती है, लेकिन उनके संरक्षण के पश्चात पूर्व के वास स्थान पर स्थापित हो जाती है इन्हें इस समूह में रखा गया है।
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