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Class 14
MATHS
किसी वस्तु के क्रमश रू 35 और रू 40 प्रत...

किसी वस्तु के क्रमश रू 35 और रू 40 प्रति किग्रा की लागत वाले दो मिश्रणो को वजन के अनुसार `2:3` के अनुपात में मिश्रित किया जाता है यदि `1//5` मिश्रण रू 46 प्रति किग्रा और शेष रू 55 प्रति किग्रा की दर से बेचा जाता है तो लाभ प्रतिशत कितना होगा ?

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A retailer bought 22 kg of rice at Rs. 35 per kg and bought 13 kg of rice at Rs. 30 per kg. If he mixed the two varieties and sold it for Rs. 40 per kg, then what profit ( in the nearest integer ) did he get ? कोई खुदरा विक्रेता 22 kg चावल 35 रूपए प्रति की दर से ख़रीदा और 13 kg चावल 30 रूपए प्रति kg की दर से ख़रीदा | जब उसने दोनों किस्मो को मिश्रित कर 40 रूपए प्रति kg की दर से बेच दिया तो उसने कितना लाभ (निकटतम पूर्णाक में ) प्राप्त किया ?

जीवन में बहुत अंधकार है और अंधकार की ही भांति अशुभ और अनीति है। कुछ लोग इस अंधकार को स्वीकार कर लेते हैं और तब उनके भीतर जो प्रकाश तक पहुँचने और पाने की आकांक्षा थी, वह । क्रमशः क्षीण होती जाती है। मैं अंधकार को इस स्वीकृति को मनुष्यों ही का सबसे बड़ा पाप कहता हूँ। यह मनुष्य का स्वयं अपने प्रति किया । गया अपराध है। उसके दूसरों के प्रति किए गए अपराधों का जन्म इस मूल पाप से ही होता है। यह समर्पण रहे कि जो व्यक्ति अपने ही प्रति इस पाप को नहीं करता है, वह किसी के भी प्रति कोई पाप न नहीं कर.सकता है। किन्तु कुछ लोग अंधकार के स्वीकार से बचने । के लिए उसके अस्वीकार में लग जाते हैं। उनका जीवन अंधकार के निषेध का ही सतत उपक्रम बन जाता है। जब व्यक्ति स्वयं के प्रति किए गए अन्याय, शोषण के विरुद्ध आवाज नहीं उठाता तो

जीवन में बहुत अंधकार है और अंधकार की ही भांति अशुभ और अनीति है। कुछ लोग इस अंधकार को स्वीकार कर लेते हैं और तब उनके भीतर जो प्रकाश तक पहुँचने और पाने की आकांक्षा थी, वह । क्रमशः क्षीण होती जाती है। मैं अंधकार को इस स्वीकृति को मनुष्यों ही का सबसे बड़ा पाप कहता हूँ। यह मनुष्य का स्वयं अपने प्रति किया । गया अपराध है। उसके दूसरों के प्रति किए गए अपराधों का जन्म इस मूल पाप से ही होता है। यह समर्पण रहे कि जो व्यक्ति अपने ही प्रति इस पाप को नहीं करता है, वह किसी के भी प्रति कोई पाप न नहीं कर.सकता है। किन्तु कुछ लोग अंधकार के स्वीकार से बचने । के लिए उसके अस्वीकार में लग जाते हैं। उनका जीवन अंधकार के निषेध का ही सतत उपक्रम बन जाता है। ''_____ और अंधकार की ही भांति अशुभ और अनीति है।" वाक्य में निपात है