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BIOLOGY
सवपरागन के लाभ व् हानियाँ बताइये |...

सवपरागन के लाभ व् हानियाँ बताइये |

लिखित उत्तर

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स्वपरागण से लाभ (Advantages of self-pollination)---
(i) इस प्रांगण की सफलता निश्चित होती है क्योँकि इसमें किसी बाहरी माध्यम की आवशयक नहीं होती है |
(ii) संतति में जाती के गन वही रहते है | अतः लक्षणों की शुद्धता रहती है | इसमें लक्षणों की शुद्धःता को आगमी पीडियोँ में बनाइये रखा जा सकता है | ख्योंकी इससे प्राप्त पादप संयोगंजी (Homozygous) होते है |
(iii) इस प्रकार के प्रांगण के लिए अधिक परागकण उत्पन्न करने की जरुरत नहीं होती है अतः यह एक मितव्ययी विधि है |
(iv) इसमें प्रांगण अभिकर्ता ( agents ) को आकर्षित करने के लिए रंग, बांध या मकरंद आदि उत्पन्न नहीं करना पड़ता है |
(v) पौधों के उपयोगी लाक्षाओं को असीमित काल के लिए संरक्षित किया जा सकता है |
सवपरगन से हानियाँ (Disadvantages of self-pollination)---
(i) सवपरागन के द्वारा पौधों में विभिन्नताएं नहीं आती अतः पौधों की नै किस्मों या प्रजातियों का उद्भव नहीं होता है
(ii) इससे बने बीज अच्छे नहीं होते व् बनने वाला पौधा भी दुर्बल व् कम प्रतिरोधक क्षमता वाला होता है
(iii) पौधों की जीवन क्षमता का भी निरंतर है होता जाता है |
(iv) पोड़ों की उत्पादन क्षमता निरंतर आने वाली पीडियोँ में कम होती जाती है
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