चित्र में दिखाई गयी पिचकारी में एक पिस्टन वायु को एक चंचू द्वारा बाहर धकेलता है। चंचू के सामने एकसमान अनुप्रस्थ-काट वाली पतली नली लगी है। नली का दूसरा सिरा द्रव से भरे एक छोटे पात्र में है। जब पिस्टन वायु को चंचू से बाहर धकेलता है, तब पात्र में द्रव उठकर चंचू में आ जाता है। ओर फुहार के रूप में बाहर निकलता है। चित्र में दिखाई गयी पिचकारी में पिस्टन तथा चंचू की त्रिज्याएँ क्रमशः 20 मिमी तथा मिमी है। पात्र का ऊपरी भाग वातावरण में खुला है।
पिस्टन को 5 मिमी/से की गति से धकेलने पर चंचू से बाहर वाली वायु की गति है