Home
Class 12
BIOLOGY
जीन प्रकटन के नियम का विस्तृत वर्णन कीजि...

जीन प्रकटन के नियम का विस्तृत वर्णन कीजिए।

लिखित उत्तर

Verified by Experts

कर्ण (कान) मुख्यतः दो प्रकार के संवेदी कार्य करता है-पहला सुनने अर्थात् श्रवण का व दूसरा शरीर का संतुलन बनाये रखने का। श्रवण की क्रिया में कर्ण पल्लव ही एक ऐसी रचना है जो स्तन्धारियों में पायी जाती है। यह फाइब्रोइलास्टिक उपास्थि से बने होते हैं। कर्ण पल्लत ध्वनि तरंगों को एकत्रित करता है जहाँ से यह कर्ण कुहर में प्रवेश करती है और कर्ण पटल झिल्ली में कम्पन्न उत्पन्न करती है। इसी के साथ ही ये कम्पन्न यहाँ से मेलियस, इन्कस, स्टेपीज तथा फेनेक्ट्रा ओवेसिस द्वारा अंतः कर्ण में पहुँचते हैं। से वे कम्पन होते हैं जो कर्णावर्त (कॉक्लिया) के भीतर के तरल को गति प्रदान कर देते हैं। इस तरल की गति (स्पंदन) को कॉर्टी अंग पकड़ लेते हैं जहाँ से इन्हें तन्त्रिका आवेगों के रूप में कॉक्लिया-तंत्रिकाओं में पहुँचा दिया जाता है। इस प्रकार से ये तंत्रिकाएँ इन सभी आवेगों को मस्तिष्क तक पहुँचाने का प्रमुख कार्य कर देती है। इस प्रकार से कर्ण द्वारा श्रवण की क्रिया का कार्य पूर्ण हो जाता है।
Promotional Banner

टॉपर्स ने हल किए ये सवाल

  • मानव के संवेदी अंग, ज्ञानेन्द्रियाँ

    MITTAL PUBLICATION|Exercise अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (अतिलघुत्तरात्मक प्रश्नोत्तर)|15 Videos
  • मानव के संवेदी अंग, ज्ञानेन्द्रियाँ

    MITTAL PUBLICATION|Exercise अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (लघूचरात्मक प्रश्नोत्तर)|10 Videos
  • मानव के संवेदी अंग, ज्ञानेन्द्रियाँ

    MITTAL PUBLICATION|Exercise पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर लघूचरात्मक प्रश्नोत्तर|5 Videos
  • मानव का श्वसन तंत्र

    MITTAL PUBLICATION|Exercise विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रश्न|25 Videos
  • मानव के प्रमुख एवं सामान्य रोग

    MITTAL PUBLICATION|Exercise विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रश्न|23 Videos