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Class 12
BIOLOGY
माइकोप्लाज्मा की संरचना का सचित्र वर्णन ...

माइकोप्लाज्मा की संरचना का सचित्र वर्णन कीजिए।

लिखित उत्तर

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आँख की बाह्य संरचना लगभग गोलाकार होती है। यह सामने की तरफ से थोड़ा उभार लिए हुए और अस्थिल कोटर के भीतर मुक्त रूप से घूम सकती है। यह एक खोखली गेंद की तरह होती है जिसके अन्दर अनेक संरचनाएँ होती हैं।
नेत्र की आंतरिक रचना में तीन पर्त हैं
(i) श्वेत पटल या स्कलेरा (Sclera) यह सबसे बाहरी, कड़ी, सफ़ेद , दो भागों से मिलकर बानी होती है जो कि सामने कि ओर कार्निया से जुड़ी होती है। मजबूत तंतुमय संयोजी ऊतक इसके 4/5 भाग का निर्माण करते हैं।
(ii) कोरॉइड (Choroid) यह बीच की योजी ऊतक से बनी पर्त होती है जो कि रुधिर वाहिनियों की उपस्थिति दर्शाती है। इसमें नीली, गहरी भूरी अथवा काले रंग की कणिकाएँ होती हैं।
(iii) दृष्टिपटल (Retina) यह सबसे भीतरी, शलाकाओं तथा शंकु से निर्मित पर्त होती है। शलाकाओं में दृष्टि, रंजक वर्णक रोडोप्सिन पाया जाता है तथा शंकुओं में आयडोप्सिन पाया जाता है।
पीत बिन्दु (Yellow spot)—यह दृष्टि अक्ष पर स्थित होता है। इसमें संवेदी कोशिकाएँ और उनमें भी विशेषकर शंकु कोशिकाएँ सर्वाधिक संख्या में पायी जाती हैं। यह भाग पीला दिखाई देता है। इसकी मध्यवर्ती गर्त को फोविया सेन्टरेलिस (Fovea centralis) कहते हैं। इसमें उपस्थित शंकु कोशिकाएँ नेत्र के सबसे अधिक संवेदी भाग का निर्माण करती हैं।
अंध बिन्दु (Blind spot)—यह पीत बिन्दु के ठीक नीचे का स्थान होता है। इसमें रेटिना की समस्त संवेदी कोशिकाओं से आने वाली दृक-तंत्रिकाएँ (Optic nerve) का निर्माण करती हैं।
नेत्र के भाग (a) तरल कक्ष (b) लेंस (Lens) (c) परितारिका (Iris)।
यह नेत्र के प्रमुख भाग होते हैं जो कि आन्तरिक रूप से लेंस द्वारा एक-दूसरे से अलग-अलग होते हैं।
(a) तरल कक्ष—इसमें जलीय तरल (नेत्रोद, Aqucous humour) भरा होता है तथा इसके पिछले भाग में गाढ़ा काँचाभ पदार्थ (Vitreous humour, vitro = काँच) भरा होता है।
(b) लेंस (Lens) यह परितारिका (Iris) के पीछे, आकृति में उभयोत्तल और अर्धठोस होता है। इसके ऊतक मुलायम जिलेटिन के बने होते हैं।
(c) परितारिका (Iris)—इसकी उपस्थिति लैंस के सामने एक पर्दे के रूप में होती है। इसी के कारण नेत्र को काला, भूरा अथवा नीला रंग कहा जा सकता है। इसमें वर्तुल तथा अरीय दो प्रकार की पेशियाँ होती हैं जो कि क्रमशः पुतली को सँकरा बनाने तथा पुतली को फैलाने के लिये होती हैं।
नेत्र की संरचना में छः प्रकार की कंकाल पेशियाँ होती हैं। इनमें से चार ऋजु एवं दो तिरछी पेशियाँ होती हैं। यह नेत्र को दायें-बायें व ऊपर-नीचे चलायमान करती हैं। मनुष्य के नेत्र के भीतरी कोण पर एक अवशेषी निकटेटिंग झिल्ली को प्लीका सेमील्यूनेरिस कहते हैं।
1. मीबोमियन ग्रंथियाँ 2. माल ग्रन्थियाँ 3. लेक्राइमल ग्रन्थियाँ या अश्रुग्रंथियाँ। ये तीन प्रकार की ग्रन्थियाँ नेत्र में पायी जाती हैं।
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