Home
Class 12
BIOLOGY
विभेदक श्वेताणु गणना (D. L.C.) का चिकित्...

विभेदक श्वेताणु गणना (D. L.C.) का चिकित्सकीय महत्व क्या है?

लिखित उत्तर

Verified by Experts

रक्त की इस जाँच में भिन्न-भिन्न प्रकार के श्वेताणुओं का प्रतिशत ज्ञात किया जाता है। यह रक्त परीक्षण कुल श्वेताणु गणना से भी अधिक उपयोगी है, क्योंकि विभिन्न रोगों में कुछ विशिष्ट प्रकार की श्वेताणुओं की संख्या बढ़ती तथा कम होती है। अत: यह रोग निदान में महत्वपूर्ण है।
विभेदक श्वेताणुओं की गणना का चिकित्सकीय महत्व निम्न
1. न्यूट्रोफिल की संख्या में वृद्धि होने पर प्रदाह तथा सामान्य मवाद उत्पन्न करने वाले रोग की जानकारी होती है।
2. अति संवेदनशीलता या एलर्जी रोग या परजीवी संक्रमण में ईओसिनोफिल्स की संख्या बढ़ जाती है।
3. चिकनपोक्स रोग में वेसोफिल्स की संख्या बढ़ जाती है। 4. काली खाँसी में लिम्फोसाइट्स की संख्या बढ़ जाती है।
5. मोनोसाइट्स की संख्या बढ़ने पर तपेदिक रोग का संकेत मिलता
6. `T_(4)` लिम्फोसाइट्स में अत्यधिक कमी होना एड्स रोग का संकेत है।
Promotional Banner

टॉपर्स ने हल किए ये सवाल

  • जैव चिकित्सा तकनीके

    MITTAL PUBLICATION|Exercise पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर (निबंधात्मक प्रश्न )|4 Videos
  • जैव चिकित्सा तकनीके

    MITTAL PUBLICATION|Exercise अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर(अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न )|15 Videos
  • जैव चिकित्सा तकनीके

    MITTAL PUBLICATION|Exercise पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर (अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न )|8 Videos
  • एन्जाइम

    MITTAL PUBLICATION|Exercise विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रश्न|20 Videos
  • जैव ऊर्जा

    MITTAL PUBLICATION|Exercise विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रश्न|9 Videos