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BIOLOGY
घड़ियाल परियोजना का संक्षिप्त वर्णन कीजिए...

घड़ियाल परियोजना का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।

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रेडियो प्रतिरक्षी आमापन (Radio Immuno Assay RIA)-RIA एक विश्लेषणात्मक विधि है, जिसका प्रयोग बहुत पहले से किया जाता रहा है। इस विधि में विश्लेषित किये जाने वाले पदार्थ के कुछ अंशों को रेडियोधर्मी पदार्थं से चिह्नित कर दिया जाता है तथा सामान्य एवं चिन्हित ऐन्टीजन अणुओं की ऐन्टीबॉडीज (प्रतिरक्षियों) के साथ क्रिया का तुलनात्मक अध्ययन किया जाता है। इस विधि में रेडियो आइसोटोप पदार्थ का उपयोग सूचक के रूप में होता है, उसे RIA कहते हैं।
रोसेलिन व येलो (Rosalyn and yulow) द्वारा खोजी गई यह विधि चिकित्सा विज्ञान में एक महत्वपूर्ण निदानात्मक तकनीक है। यह विशेषकर ऐसे जैव रासायनिक घटकों के विश्लेषण में उपयोगी है जो शरीर में अति सूक्ष्म मात्रा में विद्यमान होते हैं व उनका विश्लेषण पारम्परिक भारमितीय एवं आयतनी विषियों द्वारा संभव नहीं हो रेडियो इम्यूनी ऐसे में प्रयुक्त रेडियो आइसोटोप उच्च विशिष्टता युक्त पदार्थ होते हैं। जिसके फलस्वरूप यह तकनीक उच्च सुग्राहिता (Sensitivity) प्रदर्शित करती है।
RIA की कार्य-प्रणाली—इस विधि में विश्लेषण किये जाने . वाले पदार्थ के सामान्य अणुओं की भिन्न-भिन्न सान्द्रताओं के मानक विलयनों को समान सान्द्रताओं वाले चिह्नित पदार्थ युक्त विलयनों के साथ . प्रयोग करते हैं तथा प्रतिरक्षियों के साथ क्रिया कराते हैं। साम्यावस्था प्राप्त होने पर प्रतिजन प्रतिरक्षी सम्मिन (Antigen antibody complex) को उपयुक्त अभिकर्मकों द्वारा अवशोषित कर लेते हैं। अवक्षेपित तथा प्लावी भागों को पृथक कर उनकी रेडियोधर्मिता के मापन के द्वारा पदार्थ की सभी मात्रा को ज्ञात कर लिया जाता है। रेडियो प्रतिरक्षी विश्लेषण की एक प्रमुख विशेषता यह है कि मरीज को किसी प्रकार के हानिकारक प्रभाव की आशंका नहीं होती तथा मरीज को रेडियोआइसोटोप पदार्थ से उपचारित करने की भी आवश्यकता नहीं . होती क्योंकि समस्त क्रिया शरीर के बाहर सम्पन्न होती है।
RIA की उपयोगिता—RIA के निम्न उपयोग है
1. इस विधि के द्वारा महत्वपूर्ण जैविक घटकों जैसे विटामिन (B12 फोलिक ऐसिड), हॉर्मोन्स (थायरोक्सिन, ट्राइआसोडोथाइरोनिल. T3. कॉर्टिसोल, टेस्टोस्टेरोन, ऐस्ट्रोजन्स, ट्रॉपिक हॉर्मोन्स आदि) औषधियाँ (डिजॉक्सिन, डिजीटोक्सिन आदि) तथा ऐन्टीजन पदार्थ जैसे ऑस्ट्रेलिया ऐन्टीजन की मात्रा ज्ञात कर सकते हैं।
2. अन्त: स्रावी तंत्र के विकारों के निदान में रेडियो इम्यूनो अत्यन्तं महत्वपूर्ण तकनीक सिद्ध हुई है। उदाहरणार्थ, किसी विशिष्ट हॉर्मोन की रक्त में अधिकता उसको सावित करने वाली अन्तःसावी ग्रन्थि की अति सक्रियता का परिणाम है अथवा यह ट्रॉपिक हॉर्मोन के प्रभाव के कारण है। ऐसी समस्याओं का समाधान इस तकनीक द्वारा संभव है।
3. इस विधि द्वारा इन्सुलिनोमा, लैंगिक हॉर्मोन, सुनाही अबुंद इत्यादि का निदान संभव है, जिससे उनके उचित इलाज में सहायता मिलती है।
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