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BIOLOGY
मूत्र बनने की मात्रा किस प्रकार नियंत्रि...

मूत्र बनने की मात्रा किस प्रकार नियंत्रित की जाती है?

लिखित उत्तर

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साहली के हीमोग्लोबिन मीटर में एक मापक नलिका होती है तथा एक स्टैंड में दो मानक मैचिंग नली लगी होती हैं। दोनों मानक नलियों के मध्य एक स्थान में मापक नलिका रखी जाती हैं। मापक नलिका में शून्य (2 ग्रा.%) के चिह्न तक N/10 HCI लेते हैं। अब हीमोग्लोबिन पिपेट में 20 (0.02 मि.ली.) रक्त लेकर इसे मापक नलिका में रखे HCl में डाल देते हैं। रक्त को HCI के साथ ठीक प्रकार से मिलाने पर हीमोग्लोबिन गहरे भूरे रंग के हीमेटिन में बदल जाता है। मापक नलियों को अब मैचिंग नलिकाओं के बीच के स्थान में रखते है व उसमें बूंद-बूंद आसुत जल मिलाते हुए हिलाते रहते हैं। जब आसुत जल के मिलाने पर मापक नलिका का रंग मानक रंग से मिल जाता है तब मापक नलिका का पात्यांक लेकर हीमोग्लोबिन की मात्रा ज्ञात कर लेते हैं।
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