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BIOLOGY
वृक्कों में मूत्र निर्माण की प्रक्रिया क...

वृक्कों में मूत्र निर्माण की प्रक्रिया का वर्णन कीजिए।

लिखित उत्तर

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मनुष्य में मूत्र निर्माण वृक्क (kidneys) में पाई जाने वाले लाखों वृक्काणुओं (nephrons) द्वारा होता है। मूत्र निर्माण के तीन चरण हैं -
(i) गुच्छीय निस्पंदन या परा निस्पंदन (Glomerular Filtration or ultra filtration)
(ii) पुनः अवशोषण (Re-absorption)
(iii) स्त्रावण (secretion)
वृक्क धमनी वृक्क में लगातार नाइट्रोजनी उत्सर्जी पदार्थ युक्त रक्त की आपूर्ति करती रहती है। इस धमनी की शाखा अभिवाही धमनिकाएँ (afferent arteriole) बोमेन सम्पुट के केशिका गुच्छ (glamerulus) में रक्त आपूर्ति करती हैं। बोमेन सम्पुट में इसी केशिका गुच्छ से रक्त का निस्पंदन (filtration) होता है। निस्पंदन के कारण यूरिया जैसे उत्सर्जी पदार्थों के साथ-साथ ग्लूकोज, अमीनो अम्ल, लवण आदि भी छन कर बोमेन सम्पुट में एकत्रित हो जाते हैं। छनने (filtration) के बाद यह द्रव वृक्क नलिका के विभिन्न भागों से होकर गुजरता है। वृक्क नलिका की दीवारें पतली घनाकार उपकला (cuboidal epithelium) की बनी होती हैं। यह कोशिकाएँ निस्पंद (filtrate) में से सभी महत्वपूर्ण पदार्थ जैसे ग्लूकोज, अमीनो अम्ल, ऑयन, लवण, जल आदि अवशोषित कर रक्त को लौटा देती है। यही प्रक्रिया पुनः अवशोषण (reabsorption) कहलाती है। यूरिया का अवशोषण नहीं होता। लगभग 99 प्रतिशत निस्पंद वृक्क नलिकाओं द्वारा पुनः अवशोषित कर लिया जाता है। केशिका गुच्छ को छोड़ने वाली वाहिका अपवाही धमनिका (efferent arteriole) कहलाती है। यूरिया, अन्य उत्सर्जी पदार्थ व जल के साथ वृक्क नलिका में ही रहता है। इन्हें यहाँ से संग्रहण नलिका (collecting tubule) में ले जाया जाता है। यही मूत्र बनाता है। वृक्क नलिका में वृक्क में उपस्थित कुछ उत्सर्जी पदार्थ स्त्रावित कर दिये जाते हैं। यह प्रक्रिया स्त्रावण (secretion) कहलाती है।
वृक्क की संरचना (Structure of Kidney)-मनुष्य में सेम के बीज की आकृति के दो वृक्क उदर गुहा में शरीर की पृष्ठ सतह पर रीढ़ की हड्डी के दोनों ओर स्थित होते हैं। प्रत्येक वृक्क की लम्बाई, चौड़ाई व मोटाई क्रमशः 11 सेमी /6 सेमी व 3 सेमी होती है। यह शरीर के मुख्य उत्सर्जी अंग हैं। दायाँ वृक्क बायें वृक्क की अपेक्षा थोड़ा नीचे की ओर स्थित होता है। प्रत्येक वृक्क की पार्श्व की बाहरी सतह उत्तल (convex) तथा आन्तरिक सतह अवतल (concave) होती है | अवतल सतह पर एक खाँच होती है जिसे हाइलम कहा जाता है। इसी खाँच से वृक्क धमनी, वृक्क शिरा तथा मूत्र वाहिनी वृक्क में प्रवेश करती/बाहर निकलती है।

वृक्क की लम्ब काट में इसमें दो स्पष्ट स्तर दिखाई देते हैं। बाह्य स्तर वल्कुट या कार्टेक्स (cortex) तथा आन्तरिक स्तर मध्यांश या मैड्यूला (medulla) कहलाता है। मध्यांश 8-18 शंकु के आकार के पिण्ड (lobes) में विभाजित रहता है जो पिरामिड (Pyramid) कहलाते हैं। प्रत्येक वृक्क में लाखों उत्सर्जन इकाइयाँ वृक्काणु या नेफ्रोन (nephrons) पाये जाते है |
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