Home
Class 10
BIOLOGY
रेशमकीट की विभिन्न अवस्थाओं के बारे में ...

रेशमकीट की विभिन्न अवस्थाओं के बारे में बताते हुए समझाइये कि रेशम कैसे बनता है?

लिखित उत्तर

Verified by Experts

अंडे से उत्पन्न होने पर लार्वा बाहर आता है, इसे कैटरपिलर कहते हैं। लार्वा में एक जोड़ी लार-ग्रंथियाँ होती हैं, जिन्हें रेशम ग्रंथियाँ कहते हैं। जब रेशम ग्रंथियाँ पूरी तरह से विकसित हो जाती हैं, तो यह लार्वा से पाँच गुना अधिक लंबी हो जाती हैं। रेशम द्रव के रूप में स्रावित होता है। जब यह द्रव हवा के संपर्क में आता है, तो यह कठोर हो जाता हैं पूरी तरह से विकसित लावा का लम्बाई लगभग 7.5 cm होती है। इस अवस्था लार्वा में लार्वा भोजन नहीं करता। इसके बाद कोकून बनता है। यह अपने आपको रेशम से चारों तरफ से बाँध लेता है। कोकून के अंदर बंद निष्क्रिय लार्वा को प्यूपा कहते हैं। कोकून लगभग 1000-1200 m लंबे रेशम के धागों का बनता है। कोकून का भार 1.8 g से 2.2 g होता है। रेशम प्रोटीन का बना होता है। रेशम का आन्तरिक भाग फाइब्रोइन का तथा बाहरी भाग सेरीसिन प्रोटीन से बनता है।
Promotional Banner

टॉपर्स ने हल किए ये सवाल

  • पादपों एवं जन्तुओं के आर्थिक महत्त्व

    MITTAL PUBLICATION|Exercise अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (बहुचयनात्मक प्रश्न)|9 Videos
  • पादपों एवं जन्तुओं के आर्थिक महत्त्व

    MITTAL PUBLICATION|Exercise अन्य महत्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (अति लघुत्तरात्मक प्रश्न)|38 Videos
  • पादपों एवं जन्तुओं के आर्थिक महत्त्व

    MITTAL PUBLICATION|Exercise पाठ्यपुस्तक के प्रश्नोत्तर (लघूत्तरात्मक प्रश्न)|10 Videos
  • जैवविविधता एवं इसका संरक्षण

    MITTAL PUBLICATION|Exercise अन्य महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर ( निबंधात्मक प्रश्न )|5 Videos
  • पृथ्वी की संरचना

    MITTAL PUBLICATION|Exercise अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्नोत्तर (सुमेलन सम्बन्धी प्रश्न)|8 Videos