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BIOLOGY
पृथ्वी की आन्तरिक विवर्तनिक शक्तियों का ...

पृथ्वी की आन्तरिक विवर्तनिक शक्तियों का क्या अर्थ है? किन्हीं दो शक्तियों का वर्णन कीजिए।

लिखित उत्तर

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पृथ्वी की आन्तरिक विवर्तनिक शक्तियाँ—ये शक्तियाँ पृथ्वी के अंदर रह कर कार्य करती हैं, बाहर से दिखाई नहीं देतीं। इनकी उत्पत्ति पृथ्वी की सतह के नीचे गहराई में उपस्थित ताप से चट्टानों के फैलने-सिकुड़ने और पृथ्वी के अंदर उपस्थित गर्म तरल पदार्थ मैग्मा के स्थानांतरण आदि के कारण होती है। |
जब ये शक्तियाँ भू-गर्भ के लम्बवत् कार्य करती हैं तो भूमि की सतह के कुछ भाग ऊपर उठ जाते हैं और कुछ नीचे दब जाते हैं, जिससे महाद्वीप, द्वीप, पठार, मैदान, समुद्र आदि का निर्माण होता है।
जब ये शक्तियाँ क्षैतिज दिशा में कार्यशील होती हैं, तो तरंगें उत्पन्न होती हैं। इन तरंगों से धरातल पर वलन, भ्रंशन, चटकन, घाटी व पर्वत बनते हैं।
ज्वालामुखी-आन्तरिक विवर्तनिक शक्तियों का एक प्रभाव ज्वालामुखी है। इसमें पृथ्वी के अंदर होने वाली हलचल के कारण धरती हिलने लगती है और भूपटल को फोड़कर धुंआ, राख, वाष्प और गैसें बाहर निकलने लगती है।
दाब के कारण लावा एक नली के रूप में सतह की ओर ऊपर उठता जाता है और फिर बाहर निकल कर फैलने लगता है। ज्वालामुखी विवर्तनिक प्लेंटों से संबंधित है क्योंकि ये ज्यादातर प्लेटों की सीमाओं के सहारे पाए जाते हैं।
ज्वालामुखी के प्रकार-ज्वालामुखी को सक्रियता के. आधार पर तीन प्रकारों में वर्गीकृत किया गया है-
(a) सक्रिय ज्वालामुखी-वे ज्वालामुखी जो वर्तमान में फट रहे हों या जो फट सकते हों।
(b) मृत ज्वालामुखी-वें ज्वालामुखी जिनमें लावा व मैग्मा खत्म हो चुका है और जिनके फटने की कोई आशंका नहीं है
(c) सुप्त ज्वालामुखी-वे ज्वालामुखी जिन्हें फटने के बाद अगले विस्फोट होने में लाखों साल गुजर जाते हैं।
भकम्प-भूकम्प का अर्थ है-भू सतह का कम्पन। भाग कम्पन का कारण भू-गर्भ में होने वाली हलचल होती है। जहाँ की हलचल से कंपन प्रारंभ होते हैं, उसे कम्पन-केन्द्र (एपीसेन्टर) कहते हैं। भूकम्प का महत्व उसकी तीव्रता पर निर्भर करता है। भूकम्प को भूकम्प मापी द्वारा मापा जाता है। भूकम्प की तीव्रता को रिक्टर पैमाने पर व्यक्त किया जाता है।
भूकम्प की उत्पत्ति का कारण पृथ्वी के अंदर बनावट में असंतुलन होता है। यह असंतुलन प्रकृति या मनुष्य द्वारा बनाए जलाशयों के दाब या विस्फोट आदि से भी हो सकता है। पृथ्वी की सतह 29 प्लेटों में बँटी है। ये प्लेटें धीरे-धीरे गति करती हैं। सभी विवर्तनिक घटनाएँ इन प्लेटों के किनारे होती हैं। ये किनारे तीन प्रकार के होते हैं-रचनात्मक, विनाशी ओर संरक्षी।
विनाशी किनारों पर अधिक परिमाण के भूकम्प आते हैं। ये विनाशक होते हैं।
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