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BIOLOGY
चरक के जीवन व्रत एव चिकित्सा के क्ष...

चरक के जीवन व्रत एव चिकित्सा के क्षेत्र में उनके योगदान का वर्णन कीजिये

लिखित उत्तर

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चरक आर्युवेदिक चिकत्सा शाखा के महान आचार्य के रूप में प्रख्यात रहे है चरक पहले चिकित्स्क थे जिन्होंने पाचन उपापचय और शरीर प्रतिरक्षा की अवधारणा दी
2000 वर्ष पूर्व ही जान लिया था उन्हें उन करने का पता था जिनसे शिशु का लीन निश्चित होता है बच्चा में आनुवंशिक दोष जैसे लंगड़ापन या अंधापन माँ या पिता के किसी आभाव या त्रुटि के कारण होता है वे पहले चिक्त्शक थे जिन्होंने हिरडीए को शरीर का नियंत्रण केंद्र बताया जो शरीर से मुख्या दमनियो द्वारा जुड़ा होता है
चरक ने चरक संहिता में चिकत्सस्को व चिकत्सा विज्ञानं के विधर्ती के लिए कुछ निर्देशों व प्रतिज्ञाओं का भी उलेख किया है चरक के अनुसार चिकत्सा को रोगियों से किसी भी दिशा में शत्रुता नहीं रखनी चाईए रोगी के घर की बातो को बहार चाहिए चिकित्सक को संदेव ज्ञान की खोज में तटपर रहना चाहिए
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