वर्ण विक्षेपण - श्वेत प्रकाश की किरण जब किसी प्रिज्म के अपवर्तक फलक पर आपतित होती है तब प्रिज्म द्वारा वह अपने अवयवी वर्णों में विभाजित हो जाती है | यह घटना वर्ण विक्षेपण कहलाती है |
प्रिज्म द्वारा प्रकाश का वर्ण विक्षेपण - जब प्रिज्म में से कोई श्वेत प्रकाश को किरण गुजराती है तब वह अपने मार्ग से विचलित होकर प्रिज्म के आधार की ओर झुककर विभिन्न रंगों की किरणों में विभाजित हो जाती है इस प्रकार से उत्पन्न विभिन्न रंगों के समूह को स्पेक्ट्रम कहते हैं | इसका एक सिरा लाल तथा दूसरा सिरा बैंगनी होता है | प्रिज्म के आधार की ओर से बैंगनी, जामुनी, नीला, हरा, पीला, नारंगी तथा लाल के क्रम में होते हैं | रंगों के इस क्रम को अंग्रेजी के शब्द विबग्योर या हिंदी के शब्द बैंजनीहपीनाला से याद रखा जा सकता है |
चित्र से स्पष्ट है कि लाल प्रकाश की किरण में विचलन सबसे कम तथा बैंगनी प्रकाश किरण में विचलन सबसे अधिक होता है तथा अन्य रंगों की किरणों में विचलन लाल व बैंगनी किरणों के बीच होता है |
प्रिज्म द्वारा वर्ण विक्षेपण प्रिज्म द्वारा प्रकाश के वर्ण विक्षेपण का कारण - किसी पारदर्शी पदार्थ जैसे काँच का अपवर्तनांक प्रकाश के रंग पर निर्भर करता है | अपवर्तनांक लाल रंग के लिए सबसे कम तथा बैंगनी रंग के लिए सबसे अधिक होता है | इसी कारण से श्वेत रंग के प्रकाश का प्रिज्म में से गुजरने पर वर्ण विक्षेपण हो जाता है |