बैटरी वाहनों में विधुत ऊर्जा उत्पन्न करने का प्राथमिक स्रोत है। एसिड मिश्रण में दो प्रकार के लेड मिलाकर विधुत दाब बनाया जाता है। विधुत रासायनिक क्रिया द्वारा रासायनिक ऊर्जा में बदलती है।
बैटरी के कार्य -
1. इन्जित को चालू व बंद करने में।
2. चलते इन्जित में विधुत के लोड के प्रयोग में।
3. वोल्टेज स्टेबलाइजर के रूप में।
बैटरी के प्रकार
1. प्राथमिक सेल युक्त
2. द्वितीयक सेल युक्त
3. इलेक्ट्रोलाइट युक्त बैटरी
4. सूखी बैटरी
5. कम रख - रखाव वाली ट्यूबलर बैटरी।
वर्णन - बैटरी में निम्नलिखित अवयव पाए जाते है -
1. बाहरी खोल
2. ऊपरी ढक्कन
3. प्लेटें
4. सेप्रेटर
5. सेल
6. सेल कनेक्टर
7. सेल पार्टिशन
8. टर्मिनल छड़ें
9. वेंट ढक्कन
10 . इलेक्ट्रोलाइट
बैटरी की धनात्मक प्लेट पर लेड - ऑक्साइड `(PbO_(2))` की परत होती है। जबकि ऋणात्मक प्लेट पर लेड (Pb) की परत होती है। एक 12 वोल्ट की बैटरी में सामान्यतः 6 सेल होते है। इलेक्ट्रोलाइट मुख्यतः सल्फयूरिक एसिड `(H_(2)SO_(4))` और पानी `(H_(2)O)` का मिश्रण होता है। एक पूर्ण रूप से आवेशित बैटरी में 36% एसिड और 64% पानी होता है। वेंट ढक्कनों से आवेशन के दौरान लगातार हाइड्रोजन गैस बाहर निकलने लगती है। एक लेड एसिड बैटरी इस सिद्धांत पर आधारित है कि जब दो अलग - अलग धातुएँ किसी एसिड में डाली जाती है तो रासायनिक ऊर्जा द्वारा विधुत दाब उत्पन्न होता है। एक धातु भूरे रंग की `PbO_(2)` होती है जिस पर धनात्मक विधुत आवेश होता है। दूसरी धातु ग्रे रंग की Pb होती है इस पर ऋणात्मक विधुत आवेश होता है। एसिड मिश्रण एल्फ्यूरिक एसिड `(H_(2)SO_(4))` व पानी `(H_(2)O)` का मिश्रण होता है। इसको इलेक्ट्रोलाइट कहते है।
बैटरी की क्षमता - किसी बैटरी की क्षमता एम्पियर ऑवर से ज्ञात की जाती है। अगर कोई बैटरी 4 ऐम्पियर धारा 20 घंटे के लिए दे रही है तो उसको `80 Ah (4 xx 20 = 80 Ah)` की बैटरी बोला जायगा।