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PHYSICS
किसी 2xx10^(-5) मीटर चौड़ी स्लिट पर...

किसी `2xx10^(-5)` मीटर चौड़ी स्लिट पर 5000 Å तरंगदैधर्य का प्रकाश अभिलंबवत पड़ रहा है विवर्तन - प्रारूप में निम्निष्ट केन्द्रीय उच्चिष्ट से कितनी कोणीय चौड़ाई पर स्थित होगा ? केन्द्रीय उच्चिष्ट की कोणीय चौड़ाई भी ज्ञात कीजिए ।

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In a stadium an athlete is running on a circular path with uniform speed during a practice session. The angle covered by him during one second is found to be 10^@ by a coach observing him from the centre of the circular track. What would be the measure of angle (in degrees) described by the athlete by an observer standing on the circle? किसी स्टेडियम में एक एथलीट अभ्यास सत्र के दौरान एक समान चाल से वृत्ताकार पथ पर दौड़ रहा है | वृत्ताकार पथ के केंद्र से उसे देख रहे एक कोच की आँखों से उसके ( एथलीट ) द्वारा एक सेकंड में तय किया गया कोण 10. है | वृत्त पर खड़े प्रेक्षक की आँखों से एथलीट द्वारा बनाए गए कोण का माप क्या होगा ?

The angle of elevation of a flying drone from a point on the ground is 60^@ . After flying for 5 seconds the angle of elevation drops to 30^@ . If the drone is flying horizontally at a constant height of 1000 sqrt3 m, the distance travelled by the drone is: भूमि पर स्थित किसी बिंदु से एक उड़ते हुए ड्रोन का उन्नयन कोण 60^@ है | 5 सेकंड तक उड़ने के बाद उन्नयन कोण कम होकर 60^@ हो जाता है | यदि ड्रोन क्षेतिज रूप से 1000 sqrt3 मीटर की निश्चित ऊंचाई पर उड़ान भर रहा है, तो ड्रोन द्वारा तय की गयी दूरी ज्ञात करें |

In a school, 3/8 of the number of students are girls and the rest are boys, One -third of the number of boys are below 10 years and 2/3 of the number of girls are also below 10 years. If the number of students of age 10 Or more years is 260, then the number of boys in the school is: किसी विद्यालय में छात्रों की संख्या का 3/8 भाग लड़कियाँ और शेष लड़के है| लड़को की संख्या का एक तिहाई 10 वर्ष से कम है और लड़कियों की संख्या का 2/3 भी 10 वर्ष से कम है| यदि 10 वर्ष या उससे अधिक आयु वाले छात्रों की संख्या 260 है, तो विद्यालय में लड़को की संख्या ज्ञात कीजिए |

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नो में से सबसे उचित विकल्प चुनिए। यायावरी यात्राओं के सुखो में एक सुख तो यह है की निकले किसी चीज की खोज में और मिल जाए कोई दूसरी ही चीज। लेकिन जीवन - भर यायावरी करते रहकर भी उस कल्पनातीत आविष्कार के लिए में तैयार नहीं था। जो इस बार राम - जानकी यात्रा के दौरान अकस्मात हुआ। यह तो जानता था की रामायण के चरित्रों से सम्बद्ध जिन स्थलों की खोज में निकला हूँ , उनके ऐसे अवशेष तो क्या ही मिल सकते है जिन्हे 'ऐतिहासिक' कहा जाए और यह भी जानता था की रामायण क चरित्रों से सम्बद्ध जिन स्थलों की खोज में निकला हूँ उनके ऐसे बहुत से स्थल मिल जायेंगे जिनका रामायण से कोई वास्तविक सम्बन्ध जरूर रहा हो , लेकिन उन्हें देखकर एकाएक यह मानने को जी होने लगे की कुछ सम्बन्ध जरूर रहा होगा। खासकर नेपाल ट्राई के जंगलो और नदी -नालो -भरे प्रदेशमें से गुजरते हुए तो मन हो ऐसा हो गया था किसी भी स्थल से जुड़ी किसी असुर की , गन्धर्व की , अप्सरा की , किरात अथवा नागकन्या की गाथा सुनकर एकाएक यह प्रतिक्रिया न होती की यह सब मनगढ़ंत है , ऐसा वास्तव में हुआ नहीं होगा , केवल आदिम -मानव की कच्ची कल्पना ने ये किससे गड़े होंगे। निश्चय ही स्थलों का अपना जादू होता है। ठोस व्यावहारिक आदमी भी ऐसे स्थलों पर पहुंचकर पाता है की उसकी कल्पना चेत उठी है फिर उसे अपनी संस्कृति के पुराण की ही बाते क्यों , दूसरी संस्कृतियों के पुराण भी सच्चे जान पढ़ने लगते है उनके भी वन - देवता और लता -बलाएँ और नदी -अप्सराएं देखते -देखते उसके आगे रूप लेने लगती है। धार्मिक स्थलों पर भ्रमण करने से क्या प्रभाव पड़ता है ?

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नो में से सबसे उचित विकल्प चुनिए। यायावरी यात्राओं के सुखो में एक सुख तो यह है की निकले किसी चीज की खोज में और मिल जाए कोई दूसरी ही चीज। लेकिन जीवन - भर यायावरी करते रहकर भी उस कल्पनातीत आविष्कार के लिए में तैयार नहीं था। जो इस बार राम - जानकी यात्रा के दौरान अकस्मात हुआ। यह तो जानता था की रामायण के चरित्रों से सम्बद्ध जिन स्थलों की खोज में निकला हूँ , उनके ऐसे अवशेष तो क्या ही मिल सकते है जिन्हे 'ऐतिहासिक' कहा जाए और यह भी जानता था की रामायण क चरित्रों से सम्बद्ध जिन स्थलों की खोज में निकला हूँ उनके ऐसे बहुत से स्थल मिल जायेंगे जिनका रामायण से कोई वास्तविक सम्बन्ध जरूर रहा हो , लेकिन उन्हें देखकर एकाएक यह मानने को जी होने लगे की कुछ सम्बन्ध जरूर रहा होगा। खासकर नेपाल ट्राई के जंगलो और नदी -नालो -भरे प्रदेशमें से गुजरते हुए तो मन हो ऐसा हो गया था किसी भी स्थल से जुड़ी किसी असुर की , गन्धर्व की , अप्सरा की , किरात अथवा नागकन्या की गाथा सुनकर एकाएक यह प्रतिक्रिया न होती की यह सब मनगढ़ंत है , ऐसा वास्तव में हुआ नहीं होगा , केवल आदिम -मानव की कच्ची कल्पना ने ये किसस गड़े होंगे। निश्चय ही स्थलों का अपना जादू होता है। ठोस व्यावहारिक आदमी भी ऐसे स्थलों पर पहुंचकर पाता है की उसकी कल्पना चेत उठी है फिर उसे अपनी संस्कृति के पुराण की ही बाते क्यों , दूसरी संस्कृतियों के पुराण भी सच्चे जान पढ़ने लगते है उनके भी वन - देवता और लता -बलाएँ और नदी -अप्सराएं देखते -देखते उसके आगे रूप लेने लगती है। रामायण -स्थलों की खोज पर जाने से पहले लेखक को क्या पता था ?

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नो में से सबसे उचित विकल्प चुनिए। यायावरी यात्राओं के सुखो में एक सुख तो यह है की निकले किसी चीज की खोज में और मिल जाए कोई दूसरी ही चीज। लेकिन जीवन - भर यायावरी करते रहकर भी उस कल्पनातीत आविष्कार के लिए में तैयार नहीं था। जो इस बार राम - जानकी यात्रा के दौरान अकस्मात हुआ। यह तो जानता था की रामायण के चरित्रों से सम्बद्ध जिन स्थलों की खोज में निकला हूँ , उनके ऐसे अवशेष तो क्या ही मिल सकते है जिन्हे 'ऐतिहासिक' कहा जाए और यह भी जानता था की रामायण क चरित्रों से सम्बद्ध जिन स्थलों की खोज में निकला हूँ उनके ऐसे बहुत से स्थल मिल जायेंगे जिनका रामायण से कोई वास्तविक सम्बन्ध जरूर रहा हो , लेकिन उन्हें देखकर एकाएक यह मानने को जी होने लगे की कुछ सम्बन्ध जरूर रहा होगा। खासकर नेपाल ट्राई के जंगलो और नदी -नालो -भरे प्रदेशमें से गुजरते हुए तो मन हो ऐसा हो गया था किसी भी स्थल से जुड़ी किसी असुर की , गन्धर्व की , अप्सरा की , किरात अथवा नागकन्या की गाथा सुनकर एकाएक यह प्रतिक्रिया न होती की यह सब मनगढ़ंत है , ऐसा वास्तव में हुआ नहीं होगा , केवल आदिम -मानव की कच्ची कल्पना ने ये किससे गड़े होंगे। निश्चय ही स्थलों का अपना जादू होता है। ठोस व्यावहारिक आदमी भी ऐसे स्थलों पर पहुंचकर पाता है की उसकी कल्पना चेत उठी है फिर उसे अपनी संस्कृति के पुराण की ही बाते क्यों , दूसरी संस्कृतियों के पुराण भी सच्चे जान पढ़ने लगते है उनके भी वन - देवता और लता -बलाएँ और नदी -अप्सराएं देखते -देखते उसके आगे रूप लेने लगती है। लेखक के अनुसार आदिमानव की कच्ची कल्पना ने किस प्रकार की कहानियों को जन्म दिया होगा ?

A sum of ₹ 8,000 invested at 10% pa amounts to ₹ 9,261 in a certain time, interest compounded half-yearly. What will be the compound interest (in ₹ ) on the same sum for the same time at double the earlier rate of interest, when interest is compounded annually? / 10% प्रति वर्ष की दर से निवेश की गयी 8,000 रुपये की एक राशि अर्धवार्षिक चक्रवृद्धि ब्याज की दर से किसी निश्चित समय में 9,261 रुपये हो जाती है | इसी राशि पर इतने ही समय के लिए पूर्व की तुलना में दोगुने दर से चक्रवद्धि ब्याज ज्ञात कीजिए, यदि ब्याज का संयोजन वार्षिक है |

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नो में से सबसे उचित विकल्प चुनिए। यायावरी यात्राओं के सुखो में एक सुख तो यह है की निकले किसी चीज की खोज में और मिल जाए कोई दूसरी ही चीज। लेकिन जीवन - भर यायावरी करते रहकर भी उस कल्पनातीत आविष्कार के लिए में तैयार नहीं था। जो इस बार राम - जानकी यात्रा के दौरान अकस्मात हुआ। यह तो जानता था की रामायण के चरित्रों से सम्बद्ध जिन स्थलों की खोज में निकला हूँ , उनके ऐसे अवशेष तो क्या ही मिल सकते है जिन्हे 'ऐतिहासिक' कहा जाए और यह भी जानता था की रामायण क चरित्रों से सम्बद्ध जिन स्थलों की खोज में निकला हूँ उनके ऐसे बहुत से स्थल मिल जायेंगे जिनका रामायण से कोई वास्तविक सम्बन्ध जरूर रहा हो , लेकिन उन्हें देखकर एकाएक यह मानने को जी होने लगे की कुछ सम्बन्ध जरूर रहा होगा। खासकर नेपाल ट्राई के जंगलो और नदी -नालो -भरे प्रदेशमें से गुजरते हुए तो मन हो ऐसा हो गया था किसी भी स्थल से जुड़ी किसी असुर की , गन्धर्व की , अप्सरा की , किरात अथवा नागकन्या की गाथा सुनकर एकाएक यह प्रतिक्रिया न होती की यह सब मनगढ़ंत है , ऐसा वास्तव में हुआ नहीं होगा , केवल आदिम -मानव की कच्ची कल्पना ने ये किसस गड़े होंगे। निश्चय ही स्थलों का अपना जादू होता है। ठोस व्यावहारिक आदमी भी ऐसे स्थलों पर पहुंचकर पाता है की उसकी कल्पना चेत उठी है फिर उसे अपनी संस्कृति के पुराण की ही बाते क्यों , दूसरी संस्कृतियों के पुराण भी सच्चे जान पढ़ने लगते है उनके भी वन - देवता और लता -बलाएँ और नदी -अप्सराएं देखते -देखते उसके आगे रूप लेने लगती है। 'यायावर' शब्द का पर्यायवाची नहीं है

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नो में से सबसे उचित विकल्प चुनिए। यायावरी यात्राओं के सुखो में एक सुख तो यह है की निकले किसी चीज की खोज में और मिल जाए कोई दूसरी ही चीज। लेकिन जीवन - भर यायावरी करते रहकर भी उस कल्पनातीत आविष्कार के लिए में तैयार नहीं था। जो इस बार राम - जानकी यात्रा के दौरान अकस्मात हुआ। यह तो जानता था की रामायण के चरित्रों से सम्बद्ध जिन स्थलों की खोज में निकला हूँ , उनके ऐसे अवशेष तो क्या ही मिल सकते है जिन्हे 'ऐतिहासिक' कहा जाए और यह भी जानता था की रामायण क चरित्रों से सम्बद्ध जिन स्थलों की खोज में निकला हूँ उनके ऐसे बहुत से स्थल मिल जायेंगे जिनका रामायण से कोई वास्तविक सम्बन्ध जरूर रहा हो , लेकिन उन्हें देखकर एकाएक यह मानने को जी होने लगे की कुछ सम्बन्ध जरूर रहा होगा। खासकर नेपाल ट्राई के जंगलो और नदी -नालो -भरे प्रदेशमें से गुजरते हुए तो मन हो ऐसा हो गया था किसी भी स्थल से जुड़ी किसी असुर की , गन्धर्व की , अप्सरा की , किरात अथवा नागकन्या की गाथा सुनकर एकाएक यह प्रतिक्रिया न होती की यह सब मनगढ़ंत है , ऐसा वास्तव में हुआ नहीं होगा , केवल आदिम -मानव की कच्ची कल्पना ने ये किससे गड़े होंगे। निश्चय ही स्थलों का अपना जादू होता है। ठोस व्यावहारिक आदमी भी ऐसे स्थलों पर पहुंचकर पाता है की उसकी कल्पना चेत उठी है फिर उसे अपनी संस्कृति के पुराण की ही बाते क्यों , दूसरी संस्कृतियों के पुराण भी सच्चे जान पढ़ने लगते है उनके भी वन - देवता और लता -बलाएँ और नदी -अप्सराएं देखते -देखते उसके आगे रूप लेने लगती है। गद्यांश में आया एक शब्द 'किरात' ________।

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