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Class 9
PHYSICS
यदि कोई ऐसा ग्रह हो जिसका द्रव्यमान तथा ...

यदि कोई ऐसा ग्रह हो जिसका द्रव्यमान तथा त्रिज्या दोनों पृथ्वी से आधी हो तो उस ग्रह की स्थल पर गुरुत्वीय त्वरण क्या होगा ?

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If the sum of radius and height of a solid cylinder is 20 cm and its total surface area is 880 cm^2 then its volume is यदि किसी ठोस बेलन की त्रिज्या ऊंचाई का जोड़ 20 से.मी. हो और उसका कूल पृष्ठीय क्षेत्रफल 880 से.मी.^2 हो तो उसकाआयतन क्या होगा?

If the base radius of 2 cylinders are in the ratio 3:4 and their heights are in the ratio of 4:9, then the ratio of their volumes is: यदि दो बेलनों के आधार की त्रिज्या का अनुपात 3 : 4 है तथा उनकी ऊंचाई का अनुपात 4 : 9 है, तो उनके आयतन का अनुपात क्या होगा ?

If a sum of money compounded annually becomes 1.44 times of itself in 2 years, then the rate of interest per annum is- यदि कोई धनराशि वार्षिक आधार पर चक्रवद्धि ब्याज पर 2 वर्षों में अपनी 1.44 गुनी हो जाती है, तो उस ब्याज की वार्षिक दर कितनी है?

The length of the two, parallel sides of a trapezium are 28 cm and 40 cm. If the length of each of its other two sides be 12 cm,then the area (in cm^2 ) of the trapezium is- एक समलंब की दो समांतर भुजाओं की लंबाई 28 सेमी और 40 सेमी हैं। यदि इसकी अन्य दो भुजाओं में प्रत्येक की लंबाई 12 सेमी हो, तो समलंब का क्षेत्रफल ( सेमी^2 में) क्या होगा?

If A is the smallest three digit number divisible by both 6 and 7 and B is the largest four digit number divisible by both 6 and 7, then what is the value of B-A? यदि A , 6 और 7 दोनों से विभाजित होने वाली तीन अंकों की सबसे छोटी संख्या है तथा B , 6 और 7 दोनों से विभाजित होने वाली चार अंकों की सबसे बड़ी संख्या है, तो B-A का मान क्या होगा ?

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नो में से सबसे उचित विकल्प चुनिए। यायावरी यात्राओं के सुखो में एक सुख तो यह है की निकले किसी चीज की खोज में और मिल जाए कोई दूसरी ही चीज। लेकिन जीवन - भर यायावरी करते रहकर भी उस कल्पनातीत आविष्कार के लिए में तैयार नहीं था। जो इस बार राम - जानकी यात्रा के दौरान अकस्मात हुआ। यह तो जानता था की रामायण के चरित्रों से सम्बद्ध जिन स्थलों की खोज में निकला हूँ , उनके ऐसे अवशेष तो क्या ही मिल सकते है जिन्हे 'ऐतिहासिक' कहा जाए और यह भी जानता था की रामायण क चरित्रों से सम्बद्ध जिन स्थलों की खोज में निकला हूँ उनके ऐसे बहुत से स्थल मिल जायेंगे जिनका रामायण से कोई वास्तविक सम्बन्ध जरूर रहा हो , लेकिन उन्हें देखकर एकाएक यह मानने को जी होने लगे की कुछ सम्बन्ध जरूर रहा होगा। खासकर नेपाल ट्राई के जंगलो और नदी -नालो -भरे प्रदेशमें से गुजरते हुए तो मन हो ऐसा हो गया था किसी भी स्थल से जुड़ी किसी असुर की , गन्धर्व की , अप्सरा की , किरात अथवा नागकन्या की गाथा सुनकर एकाएक यह प्रतिक्रिया न होती की यह सब मनगढ़ंत है , ऐसा वास्तव में हुआ नहीं होगा , केवल आदिम -मानव की कच्ची कल्पना ने ये किसस गड़े होंगे। निश्चय ही स्थलों का अपना जादू होता है। ठोस व्यावहारिक आदमी भी ऐसे स्थलों पर पहुंचकर पाता है की उसकी कल्पना चेत उठी है फिर उसे अपनी संस्कृति के पुराण की ही बाते क्यों , दूसरी संस्कृतियों के पुराण भी सच्चे जान पढ़ने लगते है उनके भी वन - देवता और लता -बलाएँ और नदी -अप्सराएं देखते -देखते उसके आगे रूप लेने लगती है। रामायण -स्थलों की खोज पर जाने से पहले लेखक को क्या पता था ?

गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नो में से सबसे उचित विकल्प चुनिए। यायावरी यात्राओं के सुखो में एक सुख तो यह है की निकले किसी चीज की खोज में और मिल जाए कोई दूसरी ही चीज। लेकिन जीवन - भर यायावरी करते रहकर भी उस कल्पनातीत आविष्कार के लिए में तैयार नहीं था। जो इस बार राम - जानकी यात्रा के दौरान अकस्मात हुआ। यह तो जानता था की रामायण के चरित्रों से सम्बद्ध जिन स्थलों की खोज में निकला हूँ , उनके ऐसे अवशेष तो क्या ही मिल सकते है जिन्हे 'ऐतिहासिक' कहा जाए और यह भी जानता था की रामायण क चरित्रों से सम्बद्ध जिन स्थलों की खोज में निकला हूँ उनके ऐसे बहुत से स्थल मिल जायेंगे जिनका रामायण से कोई वास्तविक सम्बन्ध जरूर रहा हो , लेकिन उन्हें देखकर एकाएक यह मानने को जी होने लगे की कुछ सम्बन्ध जरूर रहा होगा। खासकर नेपाल ट्राई के जंगलो और नदी -नालो -भरे प्रदेशमें से गुजरते हुए तो मन हो ऐसा हो गया था किसी भी स्थल से जुड़ी किसी असुर की , गन्धर्व की , अप्सरा की , किरात अथवा नागकन्या की गाथा सुनकर एकाएक यह प्रतिक्रिया न होती की यह सब मनगढ़ंत है , ऐसा वास्तव में हुआ नहीं होगा , केवल आदिम -मानव की कच्ची कल्पना ने ये किससे गड़े होंगे। निश्चय ही स्थलों का अपना जादू होता है। ठोस व्यावहारिक आदमी भी ऐसे स्थलों पर पहुंचकर पाता है की उसकी कल्पना चेत उठी है फिर उसे अपनी संस्कृति के पुराण की ही बाते क्यों , दूसरी संस्कृतियों के पुराण भी सच्चे जान पढ़ने लगते है उनके भी वन - देवता और लता -बलाएँ और नदी -अप्सराएं देखते -देखते उसके आगे रूप लेने लगती है। धार्मिक स्थलों पर भ्रमण करने से क्या प्रभाव पड़ता है ?

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