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PHYSICS
2 सेमी लम्बे छड़-चुम्बक की अक्ष के लम्बवत...

2 सेमी लम्बे छड़-चुम्बक की अक्ष के लम्बवत विपरीत ओर, इसके केन्द्र से x तथा 3x दूरियों (जो कि काफी बड़ी है) पर दो बिन्दु A व B स्थित है। A व B 0पर चुम्बकीय क्षेत्रो की लगभग निष्पति होगी :

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Directions : Study the following information and answer the questions given : Seven people - A, B, C, D, E, F and G are sitting in a circle. Five of them are facing the centre while two of them are facing opposite to the centre. C sits third to the left of D and both are facing the centre. E is neither an immediate neighbour of D nor of C. The one sitting exactly between D and F is facing opposite to the centre. G sits third to the right of A and G is facing the centre. One of B's neighbours is facing opposite to the centre. सात लोग- A, B, C, D, E, F और G एक वृत्ताकार घेरे में बैठे हैं। इनमें से पांच केन्द्र की ओर मुंह किए है जबकि इनमें से दो केन्द्र के विपरीत मुंह किए हैं। C, D के बाएं तीसरे स्थान पर बैठा है और दोनों केन्द्र की ओर मुंह किए हैं। E न तो D का निकटतम पड़ोसी है न ही C का। वह जो ठीक D और F के बीच बैठा है केन्द्र के विपरीत मुंह किया है। G,A के दाएं तीसरे स्थान पर बैठा है और केन्द्र की ओर मुंह किया है। B का कोई एक पड़ोसी केन्द्र के विपरीत मुंह किया है। निम्नलिखित में से कौन-सा जोड़ा ऐसे व्यक्तियों को दर्शाता है जो केन्द्र के विपरीत मुंह किए है?

Directions : Study the following information and answer the questions given : Seven people - A, B, C, D, E, F and G are sitting in a circle. Five of them are facing the centre while two of them are facing opposite to the centre. C sits third to the left of D and both are facing the centre. E is neither an immediate neighbour of D nor of C. The one sitting exactly between D and F is facing opposite to the centre. G sits third to the right of A and G is facing the centre. One of B's neighbours is facing opposite to the centre. Who is sitting second to the left of A ? / निर्देश : निम्नलिखित जानकारी को अध्ययन कीजिए और दिए गए प्रश्नों का उत्तर दीजिए: सात लोग- A, B, C, D, E, F और G एक वृत्ताकार घेरे में बैठे हैं। इनमें से पांच केन्द्र की ओर मुंह किए है जबकि इनमें से दो केन्द्र के विपरीत मुंह किए हैं। C, D के बाएं तीसरे स्थान पर बैठा है और दोनों केन्द्र की ओर मुंह किए हैं। E न तो D का निकटतम पड़ोसी है न ही C का। वह जो ठीक D और F के बीच बैठा है केन्द्र के विपरीत मुंह किया है। G,A के दाएं तीसरे स्थान पर बैठा है और केन्द्र की ओर मुंह किया है। B का कोई एक पड़ोसी केन्द्र के विपरीत मुंह किया है। A के बाएं को दूसरे स्थान पर कौन बैठा है?

Directions : Study the following information and answer the questions given : Seven people - A, B, C, D, E, F and G are sitting in a circle. Five of them are facing the centre while two of them are facing opposite to the centre. C sits third to the left of D and both are facing the centre. E is neither an immediate neighbour of D nor of C. The one sitting exactly between D and F is facing opposite to the centre. G sits third to the right of A and G is facing the centre. One of B's neighbours is facing opposite to the centre. What is the position of F with respect to B ?/ निर्देश : निम्नलिखित जानकारी को अध्ययन कीजिए और दिए गए प्रश्नों का उत्तर दीजिए: सात लोग- A, B, C, D, E, F और G एक वृत्ताकार घेरे में बैठे हैं। इनमें से पांच केन्द्र की ओर मुंह किए है जबकि इनमें से दो केन्द्र के विपरीत मुंह किए हैं। C, D के बाएं तीसरे स्थान पर बैठा है और दोनों केन्द्र की ओर मुंह किए हैं। E न तो D का निकटतम पड़ोसी है न ही C का। वह जो ठीक D और F के बीच बैठा है केन्द्र के विपरीत मुंह किया है। G,A के दाएं तीसरे स्थान पर बैठा है और केन्द्र की ओर मुंह किया है। B का कोई एक पड़ोसी केन्द्र के विपरीत मुंह किया है। B के संदर्भ में F का स्थान क्या है?

Directions : Study the following information and answer the questions given : Seven people - A, B, C, D, E, F and G are sitting in a circle. Five of them are facing the centre while two of them are facing opposite to the centre. C sits third to the left of D and both are facing the centre. E is neither an immediate neighbour of D nor of C. The one sitting exactly between D and F is facing opposite to the centre. G sits third to the right of A and G is facing the centre. One of B's neighbours is facing opposite to the centre. Who is sitting to the immediate left of E./ निर्देश : निम्नलिखित जानकारी को अध्ययन कीजिए और दिए गए प्रश्नों का उत्तर दीजिए: सात लोग- A, B, C, D, E, F और G एक वृत्ताकार घेरे में बैठे हैं। इनमें से पांच केन्द्र की ओर मुंह किए है जबकि इनमें से दो केन्द्र के विपरीत मुंह किए हैं। C, D के बाएं तीसरे स्थान पर बैठा है और दोनों केन्द्र की ओर मुंह किए हैं। E न तो D का निकटतम पड़ोसी है न ही C का। वह जो ठीक D और F के बीच बैठा है केन्द्र के विपरीत मुंह किया है। G,A के दाएं तीसरे स्थान पर बैठा है और केन्द्र की ओर मुंह किया है। B का कोई एक पड़ोसी केन्द्र के विपरीत मुंह किया है। E के तुरंत बाएं कौन है?

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये आज से सप्तदशक पूर्व सम्पादकाचार्य पराड़करजी ने कहा था- हम सब सम्पादक पत्रों की उन्नति चाहते हैं। पर हमें स्मरण रखना चाहिए कि इस उन्नति के साथ-साथ हमारी स्वातंत्र्य-हानि अवश्यम्भावी है। उन्नति व्यापारी ढंग से ही हो सकती है, इसके लिए पूँजीपति और संचालक व्यवसाय की आवश्यकता है। इनके कथनानुसार और भी पत्र का सम्पादन करना असम्भव हो जाता है। इंग्लैण्ड और अमेरिका के पत्रों में स्पष्ट देखा जाता है कि इनके समाचार स्तम्भ, मनोरंजन स्तम्भ जितने ही अच्छे हो रहे हैं, उनके सम्पादकीय स्तम्भ उतने ही निकम्मे बनते जा रहे हैं। लन्दन के 'टाइम्स' जैसे दो-तीन पत्र इसक अपवाद हैं। पर साधारण नियम वही है जो बताया जा चुका है। एडिटर की अपेक्षा मैनेजिंग एडिटर का प्रभाव और गौरव अधिक बढ़ गया है। भावी हिन्दी समाचार-पत्रों में ऐसा ही होगा। पत्र निकालकर सफलतापूर्वक चलाना बड़े-बड़े धनियों अथवा सुसंघटित कम्पनियों के लिए संभव होगा। पत्र सर्वांगसुन्दर होंगे। आकार बड़े होंगे, छपाई अच्छी होगी, मनोहर, मनोरंजक और ज्ञानवर्द्धक चित्रों से ससज्जित होंगे. लेखों में विविधता होगी, काल्पकता होगी, गम्भीर गवेषणा की झलक होगी और मनोहारिणी शक्ति भी होगी, ग्राहकों की संख्या लाखों में गिनी जाएगी। यह सब कुछ होगा पर पत्र प्राणहीन होंगे। पत्रों की नीति देशभक्त, धर्मभक्त अथवा मानवता के उपासक महाप्राण सम्पादकों की नीति न होगी- इन गुणों से सम्पन्न लेखक विकृत मस्तिष्क समझे जाएंगे, सम्पादक की कुर्सी तक उनकी पहुँच भी न होगी। वेतन भोगी सम्पादक मालिक का काम करेंगे और बड़ी खूबी के साथ करेंगे। वे हम लोगों से अच्छे होंगे। पर आज भी हमें जो स्वतन्त्रता प्राप्त है वह उन्हें न होगी। वस्तुतः पत्रों के जीवन में यही समय बहुमूल्य है। इंग्लैण्ड और अमेरिका के पत्रों ने उन्हीं दिनों सच्चा काम किया था जब उनके आकार छोटे थे, समाचार कम होते थे, ग्राहक थोडे होते थे पर सम्पादक की लेखनी में ओज था और प्राण था। उन देशों की इस उन्नति के बहुत कुछ कारण वे ही सम्पादक थे जिनसे धनी घृणा करते थे, शासक क्रुद्ध रहा करते थे और जो हमारे ही जैसे, एक पैर जेल में रखकर धर्मबुद्धि से पत्र सम्पादन किया करते थे। उनके परिश्रम से और कष्ट से पत्रों की उन्नति हुई पर उनके वंश का लोप हो गया। अब संचालक और व्यवस्थापक सर्वेसर्वा हैं, सम्पादक कुछ नहीं है। प्रस्तुत गद्यांश का उपयुक्त शीर्षक है

निम्नलिखित गद्यांश के आधार पर प्रश्नों के सही विकल्प चुनिये आज से सप्तदशक पूर्व सम्पादकाचार्य पराड़करजी ने कहा था- हम सब सम्पादक पत्रों की उन्नति चाहते हैं। पर हमें स्मरण रखना चाहिए कि इस उन्नति के साथ-साथ हमारी स्वातंत्र्य-हानि अवश्यम्भावी है। उन्नति व्यापारी ढंग से ही हो सकती है, इसके लिए पूँजीपति और संचालक व्यवसाय की आवश्यकता है। इनके कथनानुसार और भी पत्र का सम्पादन करना असम्भव हो जाता है। इंग्लैण्ड और अमेरिका के पत्रों में स्पष्ट देखा जाता है कि इनके समाचार स्तम्भ, मनोरंजन स्तम्भ जितने ही अच्छे हो रहे हैं, उनके सम्पादकीय स्तम्भ उतने ही निकम्मे बनते जा रहे हैं। लन्दन के 'टाइम्स' जैसे दो-तीन पत्र इसक अपवाद हैं। पर साधारण नियम वही है जो बताया जा चुका है। एडिटर की अपेक्षा मैनेजिंग एडिटर का प्रभाव और गौरव अधिक बढ़ गया है। भावी हिन्दी समाचार-पत्रों में ऐसा ही होगा। पत्र निकालकर सफलतापूर्वक चलाना बड़े-बड़े धनियों अथवा सुसंघटित कम्पनियों के लिए संभव होगा। पत्र सर्वांगसुन्दर होंगे। आकार बड़े होंगे, छपाई अच्छी होगी, मनोहर, मनोरंजक और ज्ञानवर्द्धक चित्रों से ससज्जित होंगे. लेखों में विविधता होगी, काल्पकता होगी, गम्भीर गवेषणा की झलक होगी और मनोहारिणी शक्ति भी होगी, ग्राहकों की संख्या लाखों में गिनी जाएगी। यह सब कुछ होगा पर पत्र प्राणहीन होंगे। पत्रों की नीति देशभक्त, धर्मभक्त अथवा मानवता के उपासक महाप्राण सम्पादकों की नीति न होगी- इन गुणों से सम्पन्न लेखक विकृत मस्तिष्क समझे जाएंगे, सम्पादक की कुर्सी तक उनकी पहुँच भी न होगी। वेतन भोगी सम्पादक मालिक का काम करेंगे और बड़ी खूबी के साथ करेंगे। वे हम लोगों से अच्छे होंगे। पर आज भी हमें जो स्वतन्त्रता प्राप्त है वह उन्हें न होगी। वस्तुतः पत्रों के जीवन में यही समय बहुमूल्य है। इंग्लैण्ड और अमेरिका के पत्रों ने उन्हीं दिनों सच्चा काम किया था जब उनके आकार छोटे थे, समाचार कम होते थे, ग्राहक थोडे होते थे पर सम्पादक की लेखनी में ओज था और प्राण था। उन देशों की इस उन्नति के बहुत कुछ कारण वे ही सम्पादक थे जिनसे धनी घृणा करते थे, शासक क्रुद्ध रहा करते थे और जो हमारे ही जैसे, एक पैर जेल में रखकर धर्मबुद्धि से पत्र सम्पादन किया करते थे। उनके परिश्रम से और कष्ट से पत्रों की उन्नति हुई पर उनके वंश का लोप हो गया। अब संचालक और व्यवस्थापक सर्वेसर्वा हैं, सम्पादक कुछ नहीं है। स्वातन्त्र्य-हानि का क्या अर्थ है?

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